क्या सुपर अल नीनो लेगा 8.57 लाख लोगों की जान? भारत में 55 हजार मौतों का अनुमान, सामने आई डराने वाली रिपोर्ट

नई दिल्ली। दुनियाभर में बदलता मानसून, अनिश्चित बारिश का चक्र और रिकॉर्ड तोड़ता तापमान अब सिर्फ मौसमी असंतुलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह इंसानी वजूद के लिए सीधे जानलेवा साबित हो रहा है। सक्रिय सुपर अल नीनो के खतरनाक प्रभावों को ट्रैक करने के लिए शोध संस्था ‘क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब’ ने एक अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘अल नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर’ पेश किया है। इस ट्रैकर के हालिया विश्लेषण ने वैश्विक समुदाय के होश उड़ा दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सुपर अल नीनो के कारण बढ़ी भीषण गर्मी से दुनियाभर में लगभग 8 लाख 57 हजार लोगों की असामयिक मौत होने की आशंका है, जिसमें से करीब 3 लाख 73 हजार मौतें अगले छह महीनों के भीतर ही दर्ज की जा सकती हैं।

मौतों का पहले से अनुमान: जीवन रक्षक साबित होगा नया ट्रैकर

यह ट्रैकर जून में अल नीनो की शुरुआत के बाद से अब तक गर्मी के चलते हुई मानवीय मौतों का सटीक ब्योरा देने के साथ-साथ अगले छह महीनों का संभावित अनुमान भी प्रस्तुत करता है। वैश्विक स्तर पर क्षेत्रीय और राज्यवार आंकड़े उपलब्ध कराकर यह टूल अंतरराष्ट्रीय राहत संस्थाओं, नीति-निर्माताओं और सरकारों को यह समझने में मदद कर रहा है कि जलवायु परिवर्तन की मार सबसे ज्यादा किस इलाके पर पड़ रही है। इससे उन क्षेत्रों में समय रहते स्वास्थ्य संसाधन, पेयजल, कूलिंग शेल्टर और राहत पैकेज पहुंचाना संभव हो सकेगा जहां मानवीय जीवन सबसे गंभीर जोखिम में है।

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में अर्थशास्त्र के मिल्टन फ्रीडमैन डिस्टिंग्विश्ड सर्विस प्रोफेसर और क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन ने इस प्रणाली के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि नई पूर्वानुमान तकनीक ने उस बुनियादी सवाल का समाधान पेश किया है कि भीषण गर्मी के चलते किन इलाकों में लोग अपनी जान गंवा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जानलेवा गर्मी के प्रभाव का पहले से वैज्ञानिक आकलन करना एक युगांतरकारी कदम है, जिससे इंसानी जान का नुकसान होने से पहले ही जरूरी निवारक नीतियां धरातल पर उतारी जा सकती हैं।

विकासशील देशों पर सबसे भारी मार, भारत में मार्च में बढ़ेगा सबसे ज्यादा खतरा

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि सुपर अल नीनो की इस भयंकर तपिश का सबसे दर्दनाक असर विकासशील और कम आय वाले देशों पर पड़ रहा है। आगामी छह महीनों की अवधि के दौरान सर्वाधिक मानवीय नुकसान नाइजीरिया में होने की आशंका जताई गई है, जहां भीषण लू और गर्मी के चलते लगभग 56,000 लोग अपनी जान गंवा सकते हैं। नाइजीरिया के बाद इस वैश्विक सूची में दूसरा सबसे संवेदनशील और प्रभावित देश भारत है, जहां करीब 55,000 मौतें होने का अनुमान लगाया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में इस जानलेवा प्रभाव का चरम मार्च के महीने में देखने को मिलेगा, जब तापमान में अचानक तेज उछाल आने से मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है। इसके अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया इस मौसमी आपदा का सबसे प्रमुख हॉटस्पॉट बना हुआ है। विश्लेषण के अनुसार इंडोनेशिया में अल नीनो जनित गर्मी के चलते लगभग 29,000 नागरिकों की मौत होने का अंदेशा है, जबकि ब्राजील में भी हर महीने गर्मी से जुड़ी मौतें सामान्य औसत से कहीं अधिक दर्ज की जा रही हैं।

अल नीनो के अंत तक हर माह जारी होगा सटीक डेटा

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस सुपर अल नीनो का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब हर महीने अपने इस हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर को अद्यतन करती रहेगी। इससे दुनिया भर की सरकारों को वास्तविक समय में यह जानकारी मिलती रहेगी कि तापमान में बदलाव के साथ स्वास्थ्य जोखिमों का दायरा किस तरह बदल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संबंधित सरकारों ने तत्काल प्रभाव से हीट एक्शन प्लान, कार्यस्थल सुरक्षा नियम और प्राथमिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं किया, तो आने वाले महीने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए भारी मानवीय संकट लेकर आ सकते हैं।

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