पंडित प्रदीप मिश्रा का विवादित बयान: महिलाओं के पहनावे को अपराध से जोड़ा, विरोध तेज
जयपुर (राजस्थान) – मध्य प्रदेश के सीहोर निवासी और प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। जयपुर में चल रही सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के दौरान उन्होंने महिलाओं के पहनावे को लेकर टिप्पणी की, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और इसकी चौतरफा आलोचना भी हो रही है।
क्या कहा पंडित प्रदीप मिश्रा ने?
शनिवार, 3 मई को कथा के दूसरे दिन मिश्रा ने मंच से कहा: “लड़कियों के पेट की नाभि ढकी रहेगी, तभी वह सुरक्षित रह सकती हैं, क्योंकि आज के समय में पहनावे की वजह से ही अपराध बढ़ रहे हैं।”
उन्होंने तुलसी के पौधे का उदाहरण देते हुए कहा: “अगर तुलसी के पौधे की जड़ दिखने लगे तो पौधा मर जाता है। ऐसे ही लड़कियों की नाभि भी उनके शरीर की जड़ है। जितना ढका रहेगा, महिलाएं उतनी सुरक्षित बनी रहेंगी।”
‘संस्कार ही रोक सकते हैं अपराध’
कथा के दौरान मिश्रा ने यह भी कहा कि दुनिया की कोई सरकार अपराध रोक नहीं सकती, बल्कि केवल संस्कार ही इसे रोक सकते हैं। उन्होंने चंचला देवी के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि पहले की महिलाएं अपने पति को गलत नजर और विचार से बचने की सलाह देती थीं, लेकिन आज “सबसे गलत” अगर कुछ है तो स्त्रियों का पहनावा।
विरोध और आलोचना तेज
पंडित प्रदीप मिश्रा के इस बयान के बाद महिला संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनता में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा उनके कपड़ों से नहीं, समाज की सोच और कानून के सही अमल से तय होती है। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या अपराधियों की मानसिकता पर सवाल उठाने की जगह महिलाओं पर दोष मढ़ना उचित है?
क्या कहते हैं कानून और सामाजिक विशेषज्ञ?
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के बयान समाज में विकृत सोच को बढ़ावा देते हैं और अपराधियों को परोक्ष रूप से “जस्टिफिकेशन” प्रदान करते हैं। वहीं, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने मिश्रा से बयान वापस लेने और सार्वजनिक माफी की मांग की है।
