Sponge Plant Protest: तिल्दा में स्पंज प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का मोर्चा, कलेक्टर को ज्ञापन
ग्राम पंचायत मढ़ी, खपरी, गैतरा, सोनतरा समेत 7 गांवों के ग्रामीणों ने कलेक्टर से की यह मांग, धूल-धुआं और प्रदूषण से स्वास्थ्य पर पड़ेगा गंभीर असर
रायपुर। रायपुर जिले के तिल्दा क्षेत्र में प्रस्तावित गौरी गणेश स्पंज प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। आसपास के कई गांवों के ग्रामीणों ने कलेक्टर रायपुर को ज्ञापन सौंपकर 18 जून 2026 को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई स्थगित करने की मांग की है। यह क्षेत्र में पर्यावरणीय चिंताओं को लेकर बढ़ती जनआक्रोश का प्रतीक है।
ग्राम पंचायत मढ़ी, खपरी, गैतरा, सोनतरा, रायखेड़ा जाजगीरा, कोदवा और नकटी सहित सात गांवों के ग्रामीणों ने अपनी आपत्तियों को सूचीबद्ध करते हुए कहा है कि प्लांट के संचालन से इस क्षेत्र में धूल, धुआं और पर्यावरण प्रदूषण की समस्या बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही यह क्षेत्र धूल और डस्ट की समस्या से जूझ रहा है, और प्लांट से निकलने वाले धुएं से वायु प्रदूषण और बढ़ने की आशंका है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है।
प्लांट के समीप स्कूल और मंदिर, बच्चों और श्रद्धालुओं की सेहत पर खतरा
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई है कि ग्राम पंचायत मढ़ी का उच्च माध्यमिक विद्यालय प्लांट के समीप स्थित है। यहां पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चों को प्रदूषण से गंभीर नुकसान हो सकता है। स्कूली बच्चों के लिए स्वच्छ हवा की उपलब्धता को लेकर अभिभावकों में भारी आक्रोश है।
इसके अलावा, प्लांट से करीब 400 मीटर की दूरी पर स्थित मां बंगारी धाम मंदिर भी धूल और डस्ट से प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, और प्रदूषण के कारण उन्हें भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि पूजा-अर्चना का वातावरण प्रदूषण के कारण खतरे में पड़ जाएगा।
भारी वाहनों के आवागमन से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा
ज्ञापन में ग्रामीणों ने भारी मालवाहक वाहनों (ट्रकों) के आवागमन से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने, सड़कों के क्षतिग्रस्त होने तथा स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा पर संकट पैदा होने की बात भी कही गई है। वे बताते हैं कि प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकों की आवाजाही से कच्ची और पक्की सड़कें बर्बाद हो जाएंगी।
ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट के संचालन से ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ेगा, जिससे बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। वहीं, श्रमिकों के PF और ESI भुगतान में कथित अनियमितताओं तथा ओवरटाइम भुगतान से जुड़े मुद्दे भी ग्रामीणों ने उठाए हैं।
CER फंड से विकास कार्यों का वादा, अब तक अधूरा
ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में पर्यावरण स्वीकृति के दौरान कंपनी द्वारा सीईआर (CER) फंड से गांवों और 10 किलोमीटर क्षेत्र के विकास कार्य कराने का उल्लेख किया गया था, लेकिन अब तक ऐसे कार्य धरातल पर दिखाई नहीं दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फंड का उपयोग किया गया या नहीं, इसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
उनका कहना है कि कंपनी ने पर्यावरणीय मुआवजे के तहत आसपास के गांवों में स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, सड़क और पानी की व्यवस्था करने का वादा किया था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्य नहीं किया गया है।
18 जून की जनसुनवाई पर ग्रामीणों का रुख- स्थगित करो, वरना आंदोलन तेज होगा
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि 18 जून को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई तब तक नहीं होनी चाहिए, जब तक उनकी सभी आपत्तियों का निष्पक्ष समाधान नहीं किया जाता। उन्होंने कलेक्टर रायपुर से जनसुनवाई को तत्काल स्थगित करने और ग्रामीणों की पर्यावरणीय चिंताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन तेज कर देंगे और प्लांट के खिलाफ धरना-प्रदर्शन की रणनीति बनाएंगे। यह अब सिर्फ ग्रामीणों तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों का भी समर्थन मिल रहा है।
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
फिलहाल, कलेक्टर रायपुर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, अधिकारियों ने ग्रामीणों के ज्ञापन को स्वीकार कर लिया है और कहा है कि उनकी शिकायतों पर विचार किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों को गंभीरता से लेता है या फिर जनसुनवाई निर्धारित तिथि पर ही कराई जाती है।
यह मामला पर्यावरण, स्वास्थ्य और स्थानीय अधिकारों के प्रश्न से जुड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अंत तक अपनी लड़ाई लड़ेंगे और किसी भी कीमत पर इस प्लांट को उनके क्षेत्र में स्थापित नहीं होने देंगे। फिलहाल, सभी की निगाहें 18 जून की प्रस्तावित जनसुनवाई और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
यह पर्यावरणीय न्याय और स्थानीय समुदायों के अधिकारों का प्रश्न है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि कलेक्टर उनकी बात सुनेंगे और जनसुनवाई को स्थगित कर निष्पक्ष जांच के आदेश देंगे।
