‘व्यवहार को कभी व्यापार नहीं बनाया’: प्रवीण शुक्ला ने भिलाई के जनसेवक स्वर्गीय Vasistha Narayan Mishra को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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जनसेवा, सामाजिक चेतना और निःस्वार्थ समर्पण की मिसाल थे Vasistha Narayan Mishra; सेवानिवृत्त अपर संचालक प्रवीण शुक्ला ने याद किए तीन दशकों के संस्मरण

“मनुष्य का जन्म ही उसकी मृत्यु का आगाज़ है, लेकिन जीवन वो है जो दूसरों के काम आए।” भिलाई के लोकप्रिय और समर्पित जनसेवक भाई वशिष्ठ के देवलोकगमन पर सेवानिवृत्त अपर संचालक (उद्योग) प्रवीण शुक्ला ने एक बेहद मार्मिक और संवेदनशील श्रद्धांजलि अर्पित की है। जानिए क्यों बीपीएल राशन कार्ड से लेकर भिलाई इस्पात संयंत्र तक की चिंता करने वाले इस निस्वार्थ व्यक्तित्व की अंतिम यात्रा में उमड़ पड़ा पूरा शहर…

भिलाई: सामाजिक चेतना, जन कल्याण और निःस्वार्थ सेवा भाव को सर्वोपरि मानने वाले भिलाई के चहेते जनसेवक भाई वशिष्ठ की जीवन यात्रा के समापन पर क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है। उनके निधन पर सेवानिवृत्त अपर संचालक (उद्योग) प्रवीण शुक्ला ने एक अत्यंत भावुक एवं संवेदनात्मक श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को नमन किया है।

जीवन यात्रा की सार्थकता और निस्वार्थ समर्पण

श्रद्धांजलि संदेश में प्रवीण शुक्ला ने लिखा कि मनुष्य का जन्म ही उसकी मृत्यु का आगाज़ होता है, लेकिन जन्म से मृत्यु के बीच किए गए सद्कर्म, समाज व परिवार के लिए दिया गया योगदान ही व्यक्ति को उसकी जीवन यात्रा के बाद भी अमर बनाता है। भाई Vasistha Narayan Mishra हमारी मित्र मंडली की उस पीढ़ी के प्रतिनिधि थे, जिसने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की भावना को सर्वोपरि मानकर अपना संपूर्ण जीवन जनकल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

भिलाई के हर मुद्दे के लिए सजग चिंता

भिलाई में बिताए अपने लगभग तीन दशकों के अनुभवों को साझा करते हुए शुक्ला जी ने बताया कि भाई वशिष्ठ जब भी मिलते थे, किसी न किसी आम नागरिक की समस्या को लेकर चिंतित रहते थे। फिर चाहे वह किसी बीपीएल परिवार का राशन कार्ड बनवाना हो, भिलाई औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों पर अधिरोपित संपत्ति कर का मामला हो, या फिर कलेक्टोरेट दुर्ग में वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष भिलाई की समस्याएं उठाना हो। विषय और नियमों का गहरा ज्ञान होने के कारण उनकी तार्किक क्षमता अद्भुत थी। वे भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के हितों के साथ-साथ श्रमिकों के कल्याण, सेक्टर-9 अस्पताल की सुविधाओं और बीएसपी स्कूलों के गिरते शिक्षा स्तर को लेकर भी समान रूप से गंभीर रहते थे।

‘व्यवहार को कभी व्यापार नहीं बनाया’

उनकी राजनीतिक परिपक्वता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि Vasistha Narayan Mishra जी चाहते तो प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़कर अपने व्यक्तिगत राजनीतिक हित साध सकते थे, लेकिन उन्होंने बिना किसी राजनीतिक प्रतिबद्धता के स्वतंत्र रहकर केवल भिलाई की जनता की सेवा करना चुना। पिछले एक वर्ष से गंभीर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझने के बावजूद उनके मन में सेवा का जज्बा कभी कम नहीं हुआ।

अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाब का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग की उपस्थिति यह दर्शाती है कि भिलाई की जनता के मन में उनके प्रति कितना अगाध सम्मान था। जो भी व्यक्ति उनसे एक बार मिला, वह उन्हीं का हो गया, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी “व्यवहार को व्यापार” नहीं बनाया।

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