छत्तीसगढ़ में बिजली बिल पर नया हिसाब लागू, देरी पर अब हर दिन लगेगा 0.04% सरचार्ज
रायपुर। बिजली बिल की तारीख निकलने के बाद भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं के लिए छत्तीसगढ़ में राहत की खबर है। अब बिल जमा करने में सिर्फ एक-दो दिन की देरी होने पर पूरे महीने का विलंब अधिभार नहीं देना पड़ेगा। प्रदेश के करीब 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए सरचार्ज की गणना का तरीका बदल दिया गया है। अब देरी जितने दिनों की होगी, शुल्क भी उसी अवधि के आधार पर तय होगा।
इस बदलाव से खास तौर पर उन उपभोक्ताओं को फायदा होगा, जो किसी कारण से भुगतान की अंतिम तारीख चूक जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर अपना बिल जमा कर देते हैं। हालांकि, दूसरी ओर एडवांस में बिजली बिल जमा करने वालों को मिलने वाली छूट में कटौती की गई है।
अब पूरे महीने की जगह रोजाना जुड़ेगा सरचार्ज
नए प्रावधान के तहत बिजली बिल का भुगतान तय समय के बाद करने पर 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से विलंब अधिभार लगाया जाएगा। यानी ग्राहक ने जितने दिन देर से बिल भरा, उसी अवधि के लिए सरचार्ज देना होगा। पहले की व्यवस्था में अंतिम तारीख के बाद केवल एक दिन की देरी होने पर भी पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत सरचार्ज लगा दिया जाता था। इस वजह से कम अवधि की देरी करने वाले उपभोक्ताओं पर भी अपेक्षाकृत अधिक आर्थिक भार पड़ता था। अब दैनिक गणना लागू होने से इस स्थिति में बदलाव आया है।
4 हजार के बिल पर एक दिन की देरी का इतना शुल्क
मान लीजिए किसी उपभोक्ता का बिजली बिल 4,000 रुपये है। नई व्यवस्था के तहत एक दिन की देरी पर 0.04 प्रतिशत के हिसाब से करीब 1.60 रुपये विलंब अधिभार लगेगा। अगर भुगतान में 10 दिन की देरी होती है तो इसी दर से करीब 16 रुपये शुल्क बनेगा। वहीं करीब 30 दिनों की देरी पर कुल अधिभार लगभग 1.2 प्रतिशत, यानी 4,000 रुपये के बिल पर करीब 48 रुपये होगा। इस तरह अब एक-दो दिन की देरी के लिए उपभोक्ता को सीधे पूरे महीने का सरचार्ज नहीं देना पड़ेगा।
पुराने नियम में 1 दिन की देरी पर लगता था 60 रुपये
पुराने नियम के तहत 4,000 रुपये के बिल पर 1.5 प्रतिशत मासिक सरचार्ज लगाया जाता था। यानी भुगतान की अंतिम तारीख के बाद यदि उपभोक्ता सिर्फ एक दिन भी देर करता, तो करीब 60 रुपये अतिरिक्त देने पड़ते थे। नई दैनिक व्यवस्था में इसी बिल पर एक दिन की देरी के लिए करीब 1.60 रुपये का अधिभार बनेगा। इससे कम दिनों की देरी करने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ काफी कम हो सकता है।
50 हजार के बिल पर भी बड़ा अंतर
अधिक राशि वाले बिजली बिलों के मामले में यह अंतर और ज्यादा दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, 50,000 रुपये के बिल पर पुरानी 1.5 प्रतिशत मासिक दर के हिसाब से 750 रुपये का सरचार्ज बनता था। वहीं नई व्यवस्था में एक दिन की देरी पर 0.04 प्रतिशत के हिसाब से करीब 20 रुपये ही विलंब अधिभार लगेगा। यानी यदि भुगतान कुछ ही दिनों में कर दिया जाता है तो उपभोक्ता को पहले की तुलना में काफी कम सरचार्ज देना पड़ेगा।लाखों रुपये के बिल वाले उपभोक्ताओं के लिए भी कम दिनों की देरी की स्थिति में दैनिक गणना राहत देने वाली साबित हो सकती है।
एडवांस भुगतान करने वालों को अब कम फायदा
विलंब शुल्क की व्यवस्था में राहत के साथ ही एडवांस बिजली बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं के लिए छूट कम कर दी गई है। पहले अग्रिम भुगतान पर 1.25 प्रतिशत की छूट मिलती थी, जिसे अब घटाकर 0.75 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं में एडवांस में बिजली बिल जमा करने का चलन ज्यादा नहीं है। इसलिए इस बदलाव का असर सीमित उपभोक्ताओं पर ही पड़ने की संभावना है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदला?
नए नियम को आसान भाषा में समझें तो अब बिजली बिल की अंतिम तारीख निकलने के बाद सरचार्ज लगाने का तरीका बदल गया है। पहले कम अवधि की देरी के बावजूद पूरे महीने का शुल्क लग सकता था, जबकि अब देरी के वास्तविक दिनों के आधार पर विलंब अधिभार की गणना की जाएगी। इससे समय पर बिल नहीं भर पाने और कुछ दिनों के भीतर भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। वहीं, एडवांस भुगतान पर मिलने वाला लाभ पहले की तुलना में कम हो गया है।
