ईरान-इजराइल युद्ध के साये में नवरात्रि: गैस सिलेंडर महंगा, खाद्य तेल के दाम बढ़े… पूजा और भोग के खर्च से बढ़ी श्रद्धालुओं की परेशानी
ईरान-इजराइल युद्ध के साये में नवरात्रि
यूथ विंग्स डेस्क : मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की रसोई और आम लोगों की जेब पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान-इजराइल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका असर भारत में गैस सिलेंडर, खाद्य तेल और ईंधन की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। इसी बीच देशभर में नवरात्रि का पवित्र पर्व भी शुरू होने वाला है। ऐसे समय में जब घर-घर में पूजा, भोग और मंदिरों में बड़े आयोजन होते हैं, तब बढ़ती महंगाई श्रद्धालुओं के बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।
गैस सिलेंडर हुआ महंगा
हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत कई शहरों में 900 रुपये के पार पहुंच गई है। उदाहरण के तौर पर कोलकाता में सिलेंडर की कीमत करीब 939 रुपये हो गई है, जबकि दिल्ली में यह करीब 913 रुपये के आसपास है। इसके साथ ही 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए गए हैं, जिससे होटल, ढाबे और बड़े पैमाने पर भोजन बनाने वाले स्थानों का खर्च भी बढ़ गया है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण गैस और तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है, जिसके चलते कीमतों में यह बढ़ोतरी देखी जा रही है।
खाद्य तेल के दाम भी बढ़े
गैस के साथ-साथ खाने के तेल की कीमतों में भी तेजी आई है। बाजार में कई खाद्य तेलों के दाम 15 से 30 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब नवरात्रि के दौरान घरों में विशेष पकवान और भोग बनाए जाते हैं। हलवा, पूड़ी, साबूदाना और कई अन्य व्यंजन बनाने में तेल या घी की जरूरत होती है। ऐसे में बढ़ी कीमतों का असर सीधे त्योहार के खर्च पर पड़ सकता है।
नवरात्रि में अखंड ज्योति का खर्च बढ़ा
नवरात्रि के दौरान देवी मां की पूजा में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा होती है। कई घरों में नौ दिनों तक लगातार दीपक जलाया जाता है। दीपक जलाने के लिए आमतौर पर सरसों का तेल, तिल का तेल या घी का उपयोग किया जाता है। जब खाद्य तेल के दाम बढ़ते हैं, तो इसका असर सीधे इन धार्मिक परंपराओं के खर्च पर भी पड़ता है। मंदिरों में भी बड़ी संख्या में दीपक जलाए जाते हैं। कई जगह हजारों दीपक जलाए जाते हैं, जिससे तेल की खपत काफी बढ़ जाती है। ऐसे में मंदिर समितियों को भी अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है।
भोग और प्रसाद की तैयारी हुई महंगी
नवरात्रि के दौरान कई घरों में रोजाना देवी मां को भोग लगाया जाता है। इसमें पूड़ी-हलवा, खीर, फलाहार और व्रत के विशेष पकवान शामिल होते हैं। इन व्यंजनों को बनाने में गैस और तेल दोनों का इस्तेमाल होता है। गैस सिलेंडर और खाद्य तेल महंगे होने से भोग बनाने का खर्च भी बढ़ सकता है। मंदिरों और पंडालों में जहां बड़ी संख्या में भक्तों के लिए प्रसाद और भंडारे का आयोजन किया जाता है, वहां भी खर्च बढ़ने की संभावना है।
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मंदिर जाने का खर्च भी बढ़ा
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिरों में दर्शन करने जाते हैं। कई लोग अपने निजी वाहनों से यात्रा करते हैं। हालांकि अभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन कई शहरों में पेट्रोल पहले से ही 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास या उससे ऊपर है। उदाहरण के लिए कोलकाता में पेट्रोल करीब 103-105 रुपये प्रति लीटर के आसपास है। ऐसे में लगातार महंगे ईंधन के कारण लोगों का यात्रा खर्च पहले से ही अधिक बना हुआ है।
गैस सप्लाई को लेकर भी सतर्कता
सरकार ने भी स्थिति को देखते हुए लोगों से घबराकर गैस की बुकिंग न करने की अपील की है। रिपोर्टों के मुताबिक हाल के दिनों में एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है। सरकार ने गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं और जमाखोरी पर नजर रखी जा रही है।
बाजार और त्योहार पर असर
नवरात्रि के समय पूजा सामग्री, फल-फूल और व्रत से जुड़े खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। अगर ऊर्जा और परिवहन लागत बढ़ती है तो इसका असर बाजार की कीमतों पर भी पड़ सकता है। फल-सब्जियों और पूजा सामग्री की कीमतों में भी हल्की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
आस्था के आगे महंगाई छोटी
हालांकि बढ़ती महंगाई और वैश्विक संकट की चर्चा के बीच एक बात साफ है कि नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्वों में लोगों की आस्था सबसे बड़ी होती है। कई परिवार महंगाई के बावजूद पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराओं को पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं। मंदिरों में भी हर साल की तरह श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। इसलिए माना जा रहा है कि भले ही खर्च थोड़ा बढ़ जाए, लेकिन नवरात्रि का उत्साह और आस्था कम नहीं होगी।
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