जर्जर फ्लैट में बुनियादी सुविधाएं नदारद! MLA कॉलोनी के लिए उजड़े गरीबों के आशियाने… अब राहत के नाम पर दिखावा?

Nakti Demolition

Nakti Demolition

बारिश से पहले 80 परिवारों को सड़क पर धकेल दिया, MLA कॉलोनी के लिए गरीबों का बलिदान?

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी से सटे नया रायपुर के नकटी गांव में 29 जून 2026 को प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। करीब 80 मकानों को ध्वस्त कर दिए गए, सैकड़ों गरीब परिवार रातोंरात बेघर हो गए। बारिश का मौसम शुरू होने वाला था, फिर भी सरकार ने बिना किसी संवेदना के कार्रवाई कर दी। ग्रामीण अब कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठे हैं, उनकी आंखों में आंसू और दिल में गुस्सा है। यह सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग की मिसाल है जहां गरीबों की जमीन पर MLA कॉलोनी बनाने की जिद साफ दिखाई दे रही है।

प्रभावित परिवारों का रोना-धोना थमने का नाम नहीं ले रहा। वे कह रहे हैं कि वर्षों से शासकीय भूमि पर रह रहे थे, अब उन्हें छोटे-छोटे EWS फ्लैटों में ठूंस दिया गया है। एक कमरे में पूरा परिवार, पशु कहां रखेंगे? बिजली-पानी की सुविधा नहीं, फ्लैट जर्जर हालत में। ग्रामीणों ने तीखा आरोप लगाया “विधायक अनुज शर्मा अपने परिवार के साथ इन फ्लैटों में रहकर दिखाएं। जो फिल्म में हीरो बनते हैं, वे हमारे लिए विलेन साबित हो गए।” यह गुस्सा सिर्फ स्थानीय नहीं, पूरे प्रदेश में फैल गया है।

कांग्रेस नेता आए सामने

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले की भावना” बताया। उन्होंने कहा कि अगर ये घर पीएम आवास योजना के तहत बने थे तो अचानक अवैध कैसे हो गए? बघेल ने आरोप लगाया कि दो नेताओं के आपसी राजनीतिक विवाद का खामियाजा नकटी के गरीबों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने साफ कहा – “BJP सरकार गरीबों के आशियाने उजाड़ रही है, बुलडोजर से ताकत दिखा रही है।” बघेल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज गांव पहुंचे, प्रभावितों से मुलाकात की और चौपाल लगाई। बैज ने वादा किया कि कांग्रेस हर परिवार के साथ खड़ी है, विधानसभा से लेकर सड़क तक लड़ाई लड़ेगी।

दीपक बैज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह सुशासन नहीं, दमन है। गरीबों के घर तोड़कर MLA कॉलोनी बनाने की साजिश रची जा रही है। हम इस अन्याय के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।” उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री भी पहुंचाई।

टीएस सिंह देव जैसे अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी कार्रवाई की निंदा की और कहा कि सरकार ने नैतिक अधिकार खो दिया है।

सरकार अलाप रही सुर

सरकार का दावा है कि 65 परिवारों को सेक्टर-30 के EWS फ्लैटों में बसाया जा रहा है। बिजली, पानी, सड़क, सीवर, उद्यान सब उपलब्ध करा दिए गए। आठ सदस्यीय समिति भी गठित की गई है। गृह निर्माण मंडल कह रहा है कि पुनर्वास पारदर्शी है। लेकिन हकीकत इससे उलट है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है फ्लैट मात्र 31 वर्गमीटर के हैं, एक कमरा पूरे परिवार के लिए? पशुधन कहां रखेंगे, जिन पर उनकी आजीविका टिकी है? कई फ्लैट जर्जर हैं, बुनियादी सुविधाएं गायब।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पहले बरसात तक तोड़फोड़ न करने का आश्वासन दिया था, लेकिन सरकार ने कुछ दिनों में ही कार्रवाई कर दी। यह विश्वासघात है।

विधायक अनुज शर्मा पर ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई नियमानुसार हुई, पुनर्वास मिलेगा। लेकिन ग्रामीण उन्हें “विलेन” बता रहे हैं।

अरुण साहू और अन्य BJP नेताओं ने सरकार का बचाव किया, लेकिन विपक्ष इसे “गरीबों पर अत्याचार” बता रहा है। ओपी चौधरी जैसे मंत्रियों की चुप्पी या बचाव की कोशिशें जनता को और भड़का रही हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार “सुशासन” का ढोंग रच रही है, लेकिन नकटी जैसे मामलों में असली चेहरा सामने आ गया, गरीब हितों की अनदेखी और सत्ता के लिए भूमि की लालसा।

यह सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं

नकटी की घटना छत्तीसगढ़ में विकास के नाम पर हो रहे विस्थापन और अन्याय की बड़ी तस्वीर है। BJP सरकार शहरी विकास के नाम पर ग्रामीणों को कुचल रही है। 38 एकड़ भूमि में से 12 एकड़ विशेष योजना (संभवतः विधायक कॉलोनी) के लिए, बाकी पर आवास… लेकिन असली प्रभावित कौन? गरीब किसान और मजदूर, जिनके पास कागजात नहीं होते, लेकिन जो वर्षों से वहां बसे हैं।

बारिश के मौसम में बेघर करना इंसानियत के खिलाफ है। पुनर्वास की बातें कागजी लगती हैं जब फ्लैट छोटे, अपर्याप्त और बिना सुविधाओं के हों। यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भी लगती है, जैसा बघेल ने इशारा किया।

सरकार की नीति साफ है… अमीर और सत्ता के करीबियों के लिए विकास, गरीबों के लिए बुलडोजर। कांग्रेस का कहना है कि अगर सच्चा पुनर्वास चाहिए तो पुराने घरों जैसा स्थायी आवास दो, फ्लैट नहीं। पशुधन, खेती-बाड़ी का ध्यान रखो।

प्रदेश भर में इस घटना ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। कलेक्ट्रेट के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी है। ग्रामीण कह रहे हैं- “जब तक मांगें नहीं मानी जाएंगी, धरना चलेगा।”

नकटी गांव की यह त्रासदी साय सरकार के लिए चेतावनी है। अगर गरीबों की अनदेखी जारी रही तो जनता का गुस्सा चुनावी मैदान में दिखेगा। भूपेश बघेल, दीपक बैज जैसे नेता सड़क से सदन तक लड़ रहे हैं। सरकार को अब संवाद और संवेदना दिखानी होगी, वरना “सुशासन” का नारा खोखला साबित होगा।

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