मितानिन आंदोलन उग्र होने की चेतावनी: 4 सितंबर को राजधानी में जुटेंगी 75 हजार NHM कार्यकर्ता, सीएम हाउस का करेंगी घेराव

रायपुर: छत्तीसगढ़ की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली मितानिन दीदियां 7 अगस्त 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। रायपुर में मितानिनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी तीन सूत्रीय मांगें नहीं मानीं, तो 4 सितंबर को 75,000 से अधिक मितानिनें राजधानी में जुटकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगी।

क्या हैं मितानिनों की मुख्य मांगें?

मानदेय में वृद्धि और नियमित वेतनमान की व्यवस्था।

स्थायी नियुक्ति (नियमितीकरण) की गारंटी।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (पेंशन, बीमा आदि) का लाभ।

मितानिन संगठन का कहना है कि आज भी उन्हें केवल प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) पर काम करना पड़ता है, जबकि वे 24 घंटे गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं देती हैं।

हड़ताल का असर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर:

हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई हैं:

टीकाकरण अभियान बाधित

गर्भवती महिलाओं की देखरेख प्रभावित

पोषण सेवाओं में रुकावट

प्राथमिक उपचार और दवा वितरण बंद

गांवों में मलेरिया, डेंगू, कुपोषण और मातृत्व देखभाल जैसे कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

क्या है मितानिन योजना?

मितानिन कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2002 में हुई थी। यह छत्तीसगढ़ सरकार की अपनी मूल पहल थी, जिसका उद्देश्य था गांवों में सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना। बाद में इस मॉडल को देखकर केंद्र सरकार ने 2005 में ‘आशा कार्यकर्ता योजना’ शुरू की, जो आज पूरे देश में लागू है।

सरकार और मितानिन संगठन के बीच गतिरोध:

स्वास्थ्य विभाग ने बातचीत की कुछ कोशिशें की हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। मितानिनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

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