Madhya Pradesh Missing Child News: मध्यप्रदेश में बच्चों की सुरक्षा पर संकट, 58 हजार से ज्यादा मासूम लापता
Madhya Pradesh Missing Child News
Madhya Pradesh Missing Child News: बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कांग्रेस विधायक सचिन यादव के सवाल के जवाब में सरकार ने माना कि पिछले साढ़े चार सालों में प्रदेश से 58 हजार बच्चे और बच्चियां लापता हो गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा संख्या बच्चियों की है।
बच्चों के गुमशुदा होने के आंकड़े चिंताजनक
सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इन वर्षों में 47 हजार बच्चियां और करीब 11 हजार बच्चे गायब हुए हैं। यह आंकड़ा प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
इंदौर और धार जिले सबसे ज्यादा प्रभावित
इंदौर जिले में बच्चियों के गायब होने की सबसे अधिक घटनाएं दर्ज की गईं। बाणगंगा थाना क्षेत्र से अकेले 449 बच्चियां लापता हुईं। इसके अलावा लसूडिया, चंदन नगर, आजाद नगर और द्वारकापुरी थानों से भी बड़ी संख्या में बच्चियां गायब हुईं।
धार जिले में भी 2222 बच्चियां लापता हुईं, जो इस मामले में प्रदेश में दूसरे नंबर पर है।
विंध्य क्षेत्र की स्थिति
रीवा संभाग की स्थिति और भी भयावह है। रीवा से 1421 बच्चियां और 468 बच्चे, सतना से 1138 बच्चियां और 446 बच्चे तथा मऊगंज से 431 बच्चियां और 101 बच्चे लापता हुए हैं।
ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र
ग्वालियर जिले के ग्वालियर थाना क्षेत्र से ही 106 बच्चियां लापता हुईं। शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, मुरैना और भिंड जिलों में भी कई बच्चियां गायब हुई हैं।
बुंदेलखंड के सागर जिले में मोती नगर थाना क्षेत्र से 192 बच्चियां लापता हुईं। जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर और पन्ना में भी ऐसे सैकड़ों मामले सामने आए हैं।
मुख्यमंत्री का गृह जिला उज्जैन भी अछूता नहीं
उज्जैन जिले के बड़नगर थाना क्षेत्र से 96 बच्चियां और चिमगंज से 84 बच्चियां लापता हुईं। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश का कोई भी जिला सुरक्षित नहीं है।
ये बच्चियां कहाँ जा सकती हैं?
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चियों के लापता होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
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कुछ मामलों में ये बच्चियां मानव तस्करी के गिरोहों के चंगुल में फंस सकती हैं।
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कई बच्चियां घरेलू कामकाज के लिए बड़े शहरों में ले जाई जाती हैं।
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बाल विवाह, यौन शोषण और देह व्यापार जैसे संगठित अपराधों की भी आशंका जताई जाती है।
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वहीं, कुछ मामले घर से नाराज होकर भाग जाने या आर्थिक तंगी के कारण मजबूरी में कहीं और चले जाने से भी जुड़े होते हैं।
माता-पिता में डर और सरकार पर सवाल
इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के गायब होने से पूरे प्रदेश में चिंता का माहौल है। माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं। विपक्ष ने सरकार से पूछा है कि आखिर प्रदेश से मासूमों के गुमशुदा होने पर अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए।
