Income Tax: बैंक में जमा किए 11 लाख, फंस गए टैक्स के जाल में, ITAT ने सुनाया अहम फैसला
अगर आप बैंक में बड़ी राशि जमा कर रहे हैं, तो उसके स्रोत की पूरी जानकारी रखना बेहद जरूरी है, वरना Income Tax विभाग की नजर में यह संदिग्ध माना जा सकता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें एक एनआरआई को Income Tax नोटिस का सामना करना पड़ा, लेकिन अदालत में सच्चाई साबित होने के बाद उन्हें राहत मिल गई।
विदेश से भेजे पैसे बने विवाद की वजह
यह मामला अमेरिका के जॉर्जिया में रहने वाले एक एनआरआई से जुड़ा है। उन्होंने 2014 से 2016 के बीच MoneyGram के जरिए अपने माता-पिता को दिल्ली पैसे भेजे थे। उनके माता-पिता ने जरूरत के हिसाब से यह रकम बैंक से निकालकर घर में नकद के रूप में रखी थी।
8 नवंबर 2016 को नोटबंदी 2016 की घोषणा के समय यह नकदी घर में मौजूद थी। नोटबंदी के बाद पैसे को वैध बनाए रखने के लिए संबंधित व्यक्ति ने 21 नवंबर और 3 दिसंबर 2016 को कुल 11,18,500 रुपये ICICI Bank के खाते में जमा कर दिए। यही जमा राशि बाद में Income Tax विभाग के संदेह का कारण बनी और उन्हें नोटिस जारी किया गया।
Income Tax विभाग ने उठाए सवाल
Income Tax विभाग ने इस जमा राशि को अघोषित आय मानते हुए कार्रवाई शुरू की। विभाग का कहना था कि यह स्पष्ट नहीं है कि जमा किया गया पैसा वास्तव में विदेश से भेजी गई रकम ही है।
साथ ही विभाग ने यह भी सवाल उठाया कि प्रस्तुत सैलरी स्लिप में पद (Designation) स्पष्ट नहीं था, जिससे संदेह और बढ़ गया। इसी आधार पर Income Tax नोटिस जारी किया गया।
मामला पहुंचा अदालत
इस कार्रवाई के खिलाफ संबंधित व्यक्ति ने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण का रुख किया। उन्होंने अपनी दलील में कहा कि वे एक एनआरआई हैं और भारत में उनकी आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है, सिवाय बैंक ब्याज के।
उन्होंने अदालत में Income Tax से जुड़े सभी सवालों के जवाब देते हुए MoneyGram की रसीदें पेश कीं, जिससे यह साबित हुआ कि पैसा विदेश से ही भेजा गया था। साथ ही उन्होंने बताया कि यह रकम उनकी वर्षों की बचत थी, जिसे उन्होंने अपने माता-पिता की सहायता के लिए भेजा था।

दस्तावेजों से साबित हुई सच्चाई
अदालत में पेश किए गए पासपोर्ट रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन डिटेल्स से यह भी स्पष्ट हुआ कि वे भारत आए थे और उस समय नकदी मौजूद थी। इन सबूतों ने Income Tax विभाग के दावों को कमजोर कर दिया।
ITAT का बड़ा फैसला
8 अप्रैल 2026 को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि सभी तथ्यों को देखने के बाद संबंधित व्यक्ति की दलीलें सही प्रतीत होती हैं।
ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि बुजुर्ग माता-पिता से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे घर में रखे हर पैसे का लिखित रिकॉर्ड रखें। इसके अलावा Income Tax विभाग यह साबित नहीं कर पाया कि इस रकम के अलावा कोई अन्य आय का स्रोत था।
Income Tax नोटिस हुआ रद्द
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जमा की गई राशि को अघोषित आय नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही Income Tax विभाग द्वारा जारी नोटिस को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का आदेश दिया गया।
क्या सीख मिलती है इस मामले से?
यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि बैंक में बड़ी राशि जमा करते समय उसके स्रोत के स्पष्ट दस्तावेज होना कितना जरूरी है। अगर आपके पास सही सबूत हैं, तो Income Tax से जुड़े विवादों में भी राहत मिल सकती है।
