माडवी हिड़मा का काला सच: कैसे एक आदिवासी लड़का बना देश का सबसे खतरनाक नक्सली कमांडर

कौन था माडवी हिड़मा?

कौन था माडवी हिड़मा?

बीजापुर –आंध्र प्रदेश की सीमा पर सोमवार सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में देश का सबसे खतरनाक और मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर माडवी हिड़मा उसकी पत्नी राजे उर्फ राजक्का समेत छह नक्सली ढेर हो गए। यह मुठभेड़ आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू (ASR) जिले के मारेदुमिल्ली जंगल में सुबह 6 से 7 बजे के बीच हुई। मारे गए नक्सलियों में लकमल, कमलू, मल्ला और देवे (हिड़मा का गार्ड) शामिल हैं। सुरक्षाबलों ने मौके से दो AK-47, एक रिवॉल्वर और एक पिस्तौल बरामद किया है।

50 लाख का इनामी हिड़मा: 150 से अधिक हत्याओं का मास्टरमाइंड

44 वर्षीय माडवी हिड़मा पर 50 लाख रुपये का इनाम था और वह देशभर में सबसे खतरनाक नक्सली कमांडर के रूप में कुख्यात था। छत्तीसगढ़, आंध्र, ओडिशा और महाराष्ट्र के घने जंगलों में वह अपना पकड़ बनाकर चलता था और घात लगाकर जवानों पर हमले करता था। उसके आतंक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह 150 से ज्यादा जवानों की हत्या और कई बड़े नक्सली हमलों की साजिश का जिम्मेदार था।

16 साल की उम्र में नक्सल संगठन से जुड़ा था हिड़मा

सुकमा जिले के पुवार्ती गांव में जन्मा हिड़मा सिर्फ 16 साल की उम्र में नक्सल संगठन में शामिल हो गया था। उसकी फुर्ती, रणनीतिक बुद्धि और क्रूरता ने उसे जल्द ही संगठन का बड़ा चेहरा बना दिया। वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PGLA) की बटालियन–1 का प्रमुख था। इसके अलावा माओवादी स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZ) और CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य भी था। नक्सल संगठन में उसे सबसे युवा टॉप लीडर माना जाता था।

झीरम घाटी, बुर्कापाल और दंतेवाड़ा जैसे हमलों का आरोपी

2004 से लेकर अब तक हिड़मा 30 से अधिक बड़े नक्सल हमलों में शामिल रहा।

2013 झीरम घाटी नरसंहार, जिसमें नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल सहित 27 लोग मारे गए।

2017 बुर्कापाल हमला, जिसमें 24 CRPF जवान शहीद हुए।

2021 बीजापुर हमला, जिसमें 22 जवानों को शहादत देनी पड़ी।

2010 ताड़मेटला हमला, जिसमें 76 CRPF जवान मारे गए।

इन सभी हमलों की साजिश और नेतृत्व में हिड़मा की प्रमुख भूमिका थी।

चार लेयर की सुरक्षा और लोहे जैसी अनुशासन वाली दिनचर्या

हिड़मा की सुरक्षा चार परतों में होती थी, जिसमें 200–250 सशस्त्र नक्सली उसकी रक्षा में तैनात रहते थे। वह रोज सुबह 4 बजे उठकर बटालियन से PT कराता था और दिनभर रणनीतियों पर काम करता था। रात में किताबें पढ़ना और साथियों के साथ बैठकें उसकी आदत थी। उसे बीफ का शौक था और शुगर की बीमारी के चलते वह ज्यादातर रोटी खाता था। वर्षों तक जंगलों में रहकर उसने अपने लिए एक सुरक्षित साम्राज्य बना लिया था।

संगठन को बड़ा झटका, इलाके में तनाव बरकरार

हिड़मा और उसकी टीम के ढेर होने से माओवादी संगठन को भारी नुकसान पहुंचा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नक्सली नेतृत्व को इससे सबसे बड़ा झटका लगा है। वहीं ASR जिले के जंगलों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ अभी भी जारी है और और भी नक्सलियों के मारे जाने की आशंका है।

 

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