शराब घोटाले में ED का नया दावा: ‘चैतन्य बघेल को मिले 200 से 250 करोड़ ‘, 3200 पन्नों का चालान पेश…

शराब घोटाले

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को एक और बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ 3200 पन्नों का आठवां पूरक चालान विशेष अदालत में दाखिल किया है।

करोड़ों की रकम मिलने का दावा

ईडी की ओर से दाखिल चालान में दावा किया गया है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से 200 से 250 करोड़ रुपये तक की रकम प्राप्त हुई।
जांच एजेंसी का कहना है कि इस कथित लेन-देन की पुष्टि कुछ प्रमुख आरोपियों के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट से होती है, जिसमें सौम्या, अरुणपति, अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के नाम सामने आए हैं।

POC के प्रबंधन में भूमिका का आरोप

चार्जशीट के अनुसार, चैतन्य बघेल पर 1000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध आय (Proceeds of Crime) को संभालने और आगे स्थानांतरित करने का भी आरोप है।
ईडी का दावा है कि वह इस धनराशि को तत्कालीन छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष तक पहुंचाने के लिए अनवर ढेबर और अन्य सहयोगियों के साथ समन्वय कर रहे थे।

इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया है कि शराब घोटाले से प्राप्त धन का एक हिस्सा आगे निवेश के उद्देश्य से बघेल परिवार के करीबी सहयोगियों को सौंपा गया था। इस कड़ी की जांच अभी जारी है।

जन्मदिन पर हुई थी गिरफ्तारी

प्रवर्तन निदेशालय ने 18 जुलाई को चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन के दिन भिलाई स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई। ईडी ने यह केस एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर दर्ज किया था।

राज्य को भारी नुकसान का दावा

ईडी के अनुसार, शराब घोटाले के चलते छत्तीसगढ़ सरकार को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ा। जांच एजेंसी का दावा है कि इस घोटाले से करीब 2500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई, जो विभिन्न लाभार्थियों तक पहुंचाई गई।

क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला राज्य के सबसे बड़े आर्थिक मामलों में गिना जा रहा है। ईडी और एसीबी की एफआईआर के मुताबिक, इसमें 3200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप है। जांच में सामने आया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस पूरे तंत्र को संचालित किया गया।

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