छत्तीसगढ़ पुलिस स्मृति दिवस परेड, मुख्यमंत्री साय बोले- मार्च 2026 तक प्रदेश से खत्म कर देंगे नक्सलवाद
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें ले रहा है। सुरक्षा बलों और पुलिस के जवान पूरे जोश के साथ मिशन पर तैनात हैं। मार्च 2026 तक प्रदेश को पूरी तरह नक्सलमुक्त कर देंगे। यह ऐलान मंगलवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पुलिस स्मृति दिवस परेड के दौरान किया। उन्होंने बताया कि नक्सलवाद अब केवल दो-चार जिलों तक सिमट चुका है और जल्द ही यहां से भी इसका सफाया हो जाएगा।
स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि
हर वर्ष 21 अक्टूबर को पूरे देश में पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सेना के हमले में शहीद हुए 10 सीआरपीएफ जवानों की स्मृति में हुई। मंगलवार को राजधानी रायपुर के माना स्थित 4वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल परिसर में परेड और पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ। राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा तथा डीजीपी अरुण देव गौतम सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शहीद जवानों को नमन करना था। समारोह में छत्तीसगढ़ और देशभर के शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की गई। शहीदों के नामों का सार्वजनिक वाचन कर उनके परिवारजनों को शाल, प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया।
शहीद परिवारों का सम्मान
परेड के दौरान शहीद परिवारों को मंच पर आमंत्रित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा, “जवानों के साहस और समर्पण ने छत्तीसगढ़ को नई ऊर्जा प्रदान की है। राज्य सरकार शहीद परिवारों के साथ हमेशा खड़ी रहेगी।” गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी शहीदों के योगदान की सराहना की और बताया कि शहीदों के गांवों में स्मारक बनाए जा रहे हैं।
कार्यक्रम की प्रमुख झलकियां
रायपुर के 4वीं बटालियन परिसर में भव्य परेड का आयोजन।
शहीदों को श्रद्धांजलि, नाम वाचन और परिवारों का सम्मान।
सीएम ने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने नक्सलवाद के खिलाफ डटकर मुकाबला किया और नक्सलियों को पीछे धकेल दिया।
मार्च 2026 तक नक्सल उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे तेजी से हासिल किया जाएगा।
पुलिस स्मृति दिवस का महत्व
यह दिवस 21 अक्टूबर 1959 की घटना की याद में मनाया जाता है, जब लद्दाख में भारत-तिब्बत सीमा पर गश्त के दौरान सीआरपीएफ के 10 जवान चीनी सेना के हमले में शहीद हो गए। 1962 में डीजीपी/आईजीपी सम्मेलन में इस तिथि को पुलिस स्मृति दिवस घोषित किया गया। स्वतंत्रता के बाद से 36,000 से अधिक पुलिसकर्मी कर्तव्य पालन में शहीद हो चुके हैं। इस अवसर पर देशभर में परेड, पुष्पांजलि, रक्तदान शिविर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
