खराब सड़कों को लेकर फूटा जन आक्रोश, केंद्रीय मंत्री का काफिला रोका, 11 जुलाई को कांग्रेस का बड़ा आंदोलन
तखतपुर। क्षेत्र की जर्जर सड़कों से परेशान स्थानीय लोगों का गुस्सा गुरुवार को उस वक्त फूट पड़ा, जब उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के काफिले को मनियारी नदी पुल पर रोक लिया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और सड़कों की मरम्मत की मांग की। इस घटना ने तखतपुर की बदहाल सड़कों को लेकर चल रही नाराजगी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
गड्ढों से बनी जानलेवा सड़कें, हादसे आम
दरअसल, बेलसरी मोड़ से मनियारी नदी और बरेला तक की सड़क की हालत बेहद खराब है। इस मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बारिश का पानी भरने से सड़कें और भी खतरनाक हो गई हैं। हाल ही में एक ऑटो, जिसमें गैस सिलेंडर लदे थे, इन गड्ढों में पलट गया था। साथ ही कई दोपहिया वाहन चालकों को चोटें भी आई हैं।
स्थानीय लोग लंबे समय से इस मार्ग की मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नेशनल हाईवे होने के बावजूद इस सड़क की स्थिति दिनों-दिन बदतर होती जा रही है। यही वजह है कि सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में यह मुद्दा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
केंद्रीय मंत्री का काफिला रोका, पुलिस ने संभाली स्थिति
गुरुवार को केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू तखतपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने आए थे। जब वे मुंगेली जिले की ओर लौट रहे थे, तभी मनियारी नदी पुल पर स्थानीय युवाओं ने काफिला रोक लिया। उन्होंने हाथों में बैनर लेकर नारेबाजी की और मंत्री से सड़क की मरम्मत का आश्वासन मांगा। हालांकि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में ले लिया और मंत्री का काफिला आगे बढ़ सका।
कांग्रेस का एलान – 11 जुलाई को होगा व्यापक आंदोलन
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया है। पार्टी नेताओं ने तखतपुर क्षेत्र की सड़क स्थिति को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए 11 जुलाई को बड़े पैमाने पर आंदोलन की घोषणा की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार सड़क जैसी बुनियादी समस्याओं को भी हल नहीं कर पा रही है, जिससे जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
जनता का सवाल – कब सुधरेंगी सड़कें?
स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर नेशनल हाईवे की यह हालत क्यों है? चुनावों से पहले सड़कें सुधारने का वादा किया गया था, लेकिन अब हालत बद से बदतर हो चुकी है। गड्ढों से बचने के लिए वाहन चालकों को जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
