ASHA Worker Protest: एमटीएच अस्पताल में आशा कार्यकर्ता से मारपीट के विरोध में जोरदार प्रदर्शन, CMO ने जांच का दिया आश्वासन
सीएमओ कार्यालय से रैली निकालकर एमटीएच अस्पताल पहुंचीं आशा कार्यकर्ता, सुरक्षा गार्डों के खिलाफ नारेबाजी
इंदौर। ASHA worker protest MTH hospital Indore (फोकस कीवर्ड – पहली पंक्ति में) के तहत इंदौर के एमटीएच अस्पताल में आशा कार्यकर्ता के साथ कथित मारपीट और अभद्र व्यवहार के विरोध में सोमवार को आशा-ऊषा-आशा पर्यवेक्षक एकता यूनियन (सीटू) ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक सीएमओ कार्यालय से रैली निकालते हुए एमटीएच अस्पताल पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा गार्डों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषियों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की। यह स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
यूनियन का आरोप है कि अस्पताल में अपनी ड्यूटी निभाने पहुंची आशा कार्यकर्ता के साथ सुरक्षा गार्डों ने न केवल मारपीट की, बल्कि अभद्र व्यवहार भी किया। इस घटना ने अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने क्या कहा?
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जो आशा कार्यकर्ता दिन-रात आम लोगों की सेवा में लगी रहती हैं, यदि उन्हीं के साथ अस्पताल परिसर में इस तरह का व्यवहार होगा तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह केवल एक कर्मचारी के साथ हुई घटना नहीं, बल्कि पूरे आशा परिवार के सम्मान से जुड़ा मामला है। यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
इस में यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सीएमओ को सौंपा ज्ञापन
प्रदेश अध्यक्ष कविता सोलंकी सहित यूनियन के पदाधिकारियों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमओ) डॉ. माधव प्रसाद हसानी को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें रखी गई
- घटना में शामिल सुरक्षा गार्डों और संबंधित सुरक्षा एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई
- अस्पतालों में आशा कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था
यूनियन ने क्यों किया प्रदर्शन?
यूनियन ने कहा कि अस्पताल सेवा का स्थान है, लेकिन यदि स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं को ही भय और असुरक्षा के माहौल में काम करना पड़े तो यह पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
इस में यूनियन ने कहा कि दोषियों को बचाने के बजाय उनके खिलाफ उदाहरणात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
CMO का आश्वासन
वहीं, सीएमओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और आशा कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
यह स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर सामने लाया है। फिलहाल, प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है और यूनियन ने आंदोलन को स्थगित कर दिया है, लेकिन साफ किया है कि यदि कार्रवाई संतोषजनक नहीं रही तो वे फिर से सड़कों पर उतरेंगे।
