चित्रकूट में सदी की सबसे भीषण बाढ़ से त्राहि-त्राहि: ऐतिहासिक पुल बहा; ग्राउंड जीरो पर पहुंचे CM मोहन यादव

चित्रकूट/सतना। सतना जिले की पावन धर्मनगरी चित्रकूट में शनिवार को मंदाकिनी नदी ने अपने इतिहास का सबसे भयावह और रौद्र रूप दिखाया। लगातार मूसलाधार बारिश और गोरगी बांध के टूटने से मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते हुए करीब 30 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया। इस जल-प्रलय ने धर्मनगरी के जनजीवन को पूरी तरह तबाह कर दिया। बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए रविवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों का सघन निरीक्षण किया, पीड़ितों से सीधा संवाद किया और उन्हें राहत सामग्री बांटी।

सैलाब के थपेड़ों में बहा ऐतिहासिक पुल, 400 से ज्यादा दुकानें डूबीं

बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि स्थानीय लोगों और व्यापारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला:

ऐतिहासिक पुल धाराशाई: मंदाकिनी नदी के प्रचंड वेग के आगे सबसे पुराना हनुमान धारा पहुंच मार्ग का पुल और रामघाट क्षेत्र का प्रमुख पुल टिक नहीं सके। पानी के तेज बहाव में पुल टूटकर बह गया, जिससे दोनों ओर का संपर्क पूरी तरह कट गया।

दुकानें और बाजार जलमग्न: रामघाट और भरत घाट के किनारे सजी 400 से अधिक दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह पानी में समा गए, जिससे व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान हुआ है।

प्रमुख स्थल प्रभावित: आरोग्यधाम, गुप्त गोदावरी, सती अनुसुइया आश्रम और परिक्रमा मार्ग पर पुरानी लंका तिराहे तक कई फीट पानी भर गया। नयागांव राजमहल के भीतर तक पानी घुस गया और मुख्य मार्गों पर नावें चलानी पड़ीं।

सड़क मार्ग बंद, रेलवे ट्रैक डूबा और थानों में घुसा पानी

बाढ़ का असर चित्रकूट के बुनियादी ढांचे और यातायात पर सबसे ज्यादा पड़ा:

सतना-चित्रकूट मार्ग ठप: तेज बारिश और जलभराव के चलते सतना से चित्रकूट जाने वाला मुख्य मार्ग तीन अलग-अलग स्थानों पर बंद हो गया, जिससे प्रशासनिक वाहनों और एंबुलेंस की आवाजाही घंटों बाधित रही।

ट्रेनें प्रभावित: मझगवां के समीप रेलवे ट्रैक पर पानी भरने के चलते आनंद विहार-रीवा एक्सप्रेस को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा।

रात भर चला मैराथन रेस्क्यू, 700 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला

विभीषिका शुरू होते ही जिला प्रशासन, पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) ने मोर्चा संभाला। शनिवार रात से लेकर रविवार सुबह तक चले सघन अभियान में 700 से अधिक फंसे हुए श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को मोटर बोट्स के जरिए रेस्क्यू किया गया। सतना के छह से अधिक बाढ़ प्रभावित गांवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से संपर्क कराने और उन्हें सुरक्षित गंतव्य तक भेजने की विशेष व्यवस्था की गई।

ग्राउंड जीरो पर CM डॉ. मोहन यादव: TIC बिल्डिंग में बांटी राहत

रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चित्रकूट पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की:

पीड़ितों से संवाद: मुख्यमंत्री नगर परिषद की टीआईसी (TIC) बिल्डिंग में बनाए गए राहत शिविर और आश्रय स्थल पहुंचे। उन्होंने वहां ठहरे परिवारों से आत्मीय बातचीत कर उनका ढांढस बंधाया।

राहत सामग्री वितरण: मुख्यमंत्री ने खुद अपने हाथों से बाढ़ पीड़ितों को सूखा राशन, पका हुआ भोजन, कपड़े और जरूरी राहत किट वितरित कीं।

सख्त निर्देश: अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि राहत शिविरों में शुद्ध पेयजल, नियमित स्वास्थ्य जांच और दवाओं की कोई कमी न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि पानी कम होते ही राजस्व अमला नुकसान का विस्तृत सर्वे करेगा और RBC 6/4 के तहत पीड़ितों को तत्काल मुआवजा दिया जाएगा।

बारिश थमी, जलस्तर में आ रही गिरावट

चित्रकूट के लिए राहत की बात यह है कि रविवार को बारिश की रफ्तार धीमी पड़ने के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है। हालांकि, प्रशासन और राहत दल अभी भी 24 घंटे अलर्ट मोड पर तैनात हैं ताकि पानी उतरने के बाद बीमारियों की रोकथाम, साफ-सफाई और कीचड़ हटाने का कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।

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