Chhattisgarh Monsoon Session 2025: छत्तीसगढ़ विधानसभा में तीन अहम विधेयक पारित, शिक्षा, भू-राजस्व और आवास अधिकार से जुड़े कानूनों में संशोधन

Chhattisgarh Monsoon Session 2025

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रायपुर। Chhattisgarh Monsoon Session 2025: छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को ध्वनिमत से पारित किया गया। ये विधेयक राज्य की शिक्षा व्यवस्था, भू-राजस्व प्रबंधन और नगरीय क्षेत्रों में गरीबों के आवास अधिकार से जुड़े हैं। इस दौरान सदन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राजस्व मंत्री टँकराम वर्मा ने अलग-अलग विधेयकों को प्रस्तुत किया, जिन्हें सदस्यों की सहमति से पारित कर दिया गया।

निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को लेकर नया विधेयक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सदन में छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय स्थापना विधेयक को पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करना और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना को कानूनी रूप से सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि इससे छात्रों को राज्य के भीतर ही बेहतर शिक्षा के विकल्प मिल सकेंगे।

भू-राजस्व संहिता में संशोधन से बदलेगा प्रशासनिक ढांचा

राजस्व मंत्री टँकराम वर्मा ने सदन में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक 2025 को प्रस्तुत किया। इस विधेयक के माध्यम से राज्य की भू-राजस्व प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सरल और जनहितैषी बनाने का प्रयास किया गया है। संशोधन के बाद जमीन से जुड़े मामलों में लोगों को तेज और न्यायसंगत समाधान मिल सकेगा।

शहरी गरीबों को मिलेगा पट्टा अधिकार, आवास की राह होगी आसान

वहीं, टँकराम वर्मा ने एक और महत्वपूर्ण विधेयक छत्तीसगढ़ नगरीय क्षेत्रों के आवासहीन व्यक्ति को पट्टाधृति अधिकार (संशोधन) विधेयक भी सदन में रखा, जो पारित हो गया। यह विधेयक नगरीय इलाकों में रहने वाले उन लोगों के हित में लाया गया है, जिनके पास अपने मकान के लिए वैध पट्टा नहीं है। संशोधन के बाद पात्र व्यक्तियों को कानूनी रूप से जमीन के पट्टे देने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा।

तीनों विधेयकों को मिली सदन की मंजूरी

तीनों विधेयकों पर सदन में चर्चा हुई और इसके बाद इन्हें ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री और मंत्री ने विधेयकों की जरूरत और प्रभाव को विस्तार से समझाया, जिस पर विपक्ष की तरफ से कोई कड़ा विरोध नहीं देखा गया। सरकार ने इसे जनहित में उठाया गया एक अहम कदम बताया।

इन विधेयकों के पारित होने से राज्य की प्रशासनिक और सामाजिक संरचना में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव आने की संभावना है। सरकार का दावा है कि इससे जनता को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा, खासतौर पर शिक्षा, आवास और जमीन से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलेगी।

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