सिर्फ सेहत का हाल या 2029 का कोई नया फॉर्मूला? लालू के घर पहुंचीं सोनिया गांधी, उठे सवाल

नई दिल्ली। संसद के गलियारों से लेकर दिल्ली के सियासी हलकों में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी अचानक राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के आवास पर जा पहुंचीं। दोनों पुराने सहयोगियों की इस गर्मजोशी भरी मुलाकात को औपचारिक रूप से भले ही सिर्फ ‘स्वास्थ्य का हालचाल जानने’ का शिष्टाचार बताया जा रहा हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे महज एक औपचारिक मुलाकात मानने को तैयार नहीं हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या विपक्ष की वर्तमान राजनीतिक दशा-दिशा के बीच दोनों सबसे पुराने रणनीतिकार पर्दे के पीछे किसी नए समीकरण की पटकथा लिख रहे हैं?

क्या सिर्फ स्वास्थ्य का हालचाल था या यूपीए मॉडल को दोहराने की छटपटाहट?

मुलाकात के बाद खुद लालू प्रसाद यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तस्वीरें साझा कीं, जिसमें उनके साथ बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और परिवार के अन्य सदस्य भी नजर आए। लालू यादव ने अपनी पोस्ट में जिस तरह से मनमोहन सिंह सरकार और यूपीए के दौर को याद किया, उसने कई गंभीर राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। लालू ने लिखा कि सोनिया गांधी से मुलाकात के दौरान पुराने दिनों की यादें ताजा हुईं और इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे यूपीए के दौर में मनरेगा, आरटीआई (RTI) और आरटीई (RTE) जैसे ऐतिहासिक कानून लाकर आम जनता, किसानों और युवाओं को सशक्त किया गया था।

लालू ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बिहार के विकास के लिए ₹1 लाख 45 हजार करोड़ से अधिक की धनराशि दी थी। ऐसे में सवाल उठता है कि मौजूदा विपक्षी गठबंधन की बैठकों और रणनीतियों के बीच अचानक यूपीए के पुराने स्वर्णिम दौर का यह गुणगान क्या किसी बड़े वैचारिक व रणनीतिक बदलाव का संकेत है? क्या क्षेत्रीय छत्रपों को अब भी पुराने यूपीए मॉडल में ही ज्यादा भरोसा दिखाई दे रहा है?

पुराने सिपहसालारों की यह जुगलबंदी किस नए समीकरण की ओर इशारा कर रही है?

विपक्षी खेमे में राहुल गांधी के आक्रामक रुख और संसद से सड़क तक जारी टकराव के बीच सोनिया गांधी का सीधे लालू के घर जाना अपने आप में बड़ा संदेश देता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लालू प्रसाद यादव हमेशा से सोनिया गांधी के सबसे भरोसेमंद और संकटमोचक सहयोगियों में रहे हैं। जब भी कांग्रेस केंद्र में मुश्किल में घिरी या सहयोगियों में असंतोष दिखा, लालू मजबूती से गांधी परिवार के साथ खड़े रहे। ऐसे में क्या विपक्ष के बिखराव को रोकने के लिए एक बार फिर सोनिया गांधी को खुद मोर्चे पर आना पड़ रहा है? क्या तेजस्वी यादव और कांग्रेस के बीच भविष्य की चुनावी रणनीति को लेकर कोई बड़ा ब्लूप्रिंट तैयार हो रहा है?

सिंगापुर से इलाज कराकर लौटे लालू से मिलने की टाइमिंग क्यों अहम?

लालू प्रसाद यादव लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और नियमित जांच व इलाज के लिए उन्हें कई बार सिंगापुर जाना पड़ता है, जहां वे अपनी बेटी रोहिणी आचार्य के पास रहते हैं। अभी कुछ ही दिन पहले रोहिणी आचार्य ने सिंगापुर में लालू के साथ मॉर्निंग वॉक का एक भावुक वीडियो साझा करते हुए उन्हें अपनी सबसे बड़ी शक्ति बताया था। इलाज और लगातार निगरानी के बीच लालू का दिल्ली में सक्रिय दिखना और सोनिया गांधी का स्वयं उनके दरवाजे तक चलकर आना साफ संकेत देता है कि देश की राजनीति में इस उम्र और बीमारी में भी लालू यादव की सलाह और भूमिका कांग्रेस के लिए कितनी अपरिहार्य बनी हुई है।

सवाल यह भी है कि क्या यह बैठक सिर्फ बीते दिनों का नॉस्टेल्जिया थी, या फिर आने वाले दिनों में देश की राजनीति में यूपीए की तर्ज पर विपक्ष को एक मजबूत और भरोसेमंद धुरी देने की कोई गुप्त कवायद शुरू हो चुकी है? आने वाले सियासी घटनाक्रम ही तय करेंगे कि बंद कमरे में हुई इस बातचीत का असर देश की राजनीति पर किस हद तक पड़ता है।

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