AAP की पहली लिस्ट आते ही मची भगदड़: अमृतसर से पटियाला तक 3 सिटिंग विधायकों ने ज्वाइन की बीजेपी
चंडीगढ़/पटियाला। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के भीतर बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। महज दो दिनों के भीतर पार्टी के तीन मौजूदा विधायकों ने बगावत करते हुए इस्तीफा दे दिया और सोमवार को तीनों नेताओं ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह, समाना से विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा के पाला बदलने से सूबे की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
कुंवर विजय प्रताप ने विधानसभा स्पीकर को सौंपा इस्तीफा
अमृतसर नॉर्थ के विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोमवार को पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को अपना औपचारिक इस्तीफा भेज दिया। उन्होंने अपने पत्र में 1 नवंबर 2026 से विधानसभा की सदस्यता छोड़ने का उल्लेख किया। उल्लेखनीय है कि पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ‘आप’ में शामिल हुए थे। हालांकि, पिछले काफी समय से मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी नेतृत्व के साथ उनके गंभीर मतभेद चल रहे थे और वे कानून-व्यवस्था व प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर अपनी ही सरकार पर मुखर होकर सवाल खड़े करते रहे थे।
पहली लिस्ट के बाद पटियाला के दो विधायकों ने खोला था मोर्चा
इससे पहले रविवार को पटियाला जिले के दो प्रमुख विधायकों पूर्व मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर बगावत की शुरुआत की थी। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया जब पार्टी ने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की अपनी पहली आधिकारिक सूची जारी की थी। हालांकि, पार्टी ने इस पहली सूची में समाना और सनौर दोनों सीटों पर अपने पत्ते नहीं खोले थे, जिससे नाराज होकर दोनों नेताओं ने पार्टी से किनारा कर लिया।
बीजेपी ने बढ़ाई मान सरकार की मुश्किलें
सोमवार को कुंवर विजय प्रताप सिंह, चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने एक साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। चुनाव से ठीक पहले दो दिनों के भीतर तीन मौजूदा विधायकों का सत्ताधारी दल से अलग होकर सीधे मुख्य प्रतिद्वंद्वी दल में शामिल होना भगवंत मान सरकार और आम आदमी पार्टी संगठन के लिए एक बड़ी रणनीतिक और राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।
