पेंशनर्स को बड़ा झटका: 59 महीने के एरियर भुगतान पर रोक की तैयारी, कोर्ट से ‘स्टे’ लेने के लिए वित्त विभाग ने जारी किए निर्देश

भोपाल। मध्य प्रदेश के लाखों पेंशनर्स के लिए निराशाजनक खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने लंबे समय से लंबित 59 महीने के पेंशन पुनरीक्षण एरियर्स (Pension Revision Arrears) का भुगतान करने के बजाय अब इस मामले में कोर्ट से स्टे लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों, संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को आवश्यक कानूनी कदम उठाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

32 और 27 महीने के एरियर्स का पूरा गणित

यह पूरा विवाद दो अलग-अलग समयावधियों के पेंशन पुनरीक्षण एरियर्स से जुड़ा हुआ है:

वर्ष 2006 से 2008 का बकाया: इसके तहत कुल 32 महीनों का एरियर्स लंबित है।

वर्ष 2016 से 2018 का बकाया: इसके अंतर्गत 27 महीनों के भुगतान का मामला अटका हुआ है।

दोनों अवधियों को मिलाकर कुल 59 महीने के एरियर्स की राशि बनती है, जिसकी मांग को लेकर पेंशनर्स लंबे समय से कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर लड़ाई लड़ रहे थे।

कोर्ट से स्टे लेने की तैयारी में सरकार

वित्त विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, सरकार फिलहाल पेंशनर्स को इस एरियर्स का भुगतान करने के मूड में नहीं दिख रही है। विभाग ने सभी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे विभिन्न अदालतों में लंबित प्रकरणों और अदालत की अवमानना याचिकाओं में तत्काल प्रभाव से स्थगन आदेश हासिल करने की कानूनी प्रक्रिया पूरी करें।

हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ के आदेशों का दिया हवाला

अपने निर्देश में वित्त विभाग ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ द्वारा पारित पूर्व आदेशों का संदर्भ दिया है। सरकार का तर्क है कि न्यायिक मिसालों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर इन लंबित मामलों में स्थगन प्राप्त किया जाना चाहिए, ताकि तत्काल वित्तीय देनदारी से बचा जा सके।

प्रशासनिक स्तर पर जारी इस आदेश के बाद प्रदेश के पेंशनर संघों में असंतोष की लहर दौड़ गई है, क्योंकि पेंशनरों को उम्मीद थी कि सरकार जल्द ही इस वित्तीय बकाए का निपटारा करेगी।

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