Bhupesh Baghel Interview: सरकार पर बरसे पूर्व CM, बिजली-शिक्षा से लेकर महादेव सट्टा और बस्तर पर खुलकर बोले
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने एक विशेष इंटरव्यू में राज्य की विष्णुदेव साय सरकार, कांग्रेस संगठन, महादेव सट्टा मामले, बस्तर में नक्सलवाद, बिजली की बढ़ती दरों, शिक्षा व्यवस्था और किसानों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने मौजूदा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि प्रदेश में जनता से जुड़े अनेक मुद्दों का समाधान नहीं हो पा रहा है।
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सरकार पर हमला
भूपेश बघेल ने विधानसभा में कांग्रेस की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष ने सरकार की कथित नाकामियों को सामने रखने के लिए विस्तृत तैयारी की थी। उनके मुताबिक, अविश्वास प्रस्ताव के लिए 136 बिंदुओं और करीब 151 पन्नों में मुद्दे तैयार किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा में लंबी चर्चा के बावजूद सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाने के बजाय पिछली सरकार की आलोचना करता रहा। बघेल ने दावा किया कि मौजूदा सरकार अपने कार्यकाल में जनता को कोई बड़ी नई उपलब्धि नहीं दे सकी।
महंगाई, खाद और बिजली के मुद्दे पर सरकार को घेरा
भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश की जनता कई मोर्चों पर परेशान है। उन्होंने रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, खाद, बीज और बिजली को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उनका दावा था कि कृषि सीजन में किसानों को खाद की कमी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली की बढ़ती कीमतों को लेकर उन्होंने कहा कि ढाई साल में कई बार बिजली दरों में बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। बघेल ने स्मार्ट मीटर को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि उपभोक्ताओं के बीच बिजली बिल को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
स्वामी आत्मानंद स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया
पूर्व मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में विद्यार्थी स्वयं विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और कुछ जगह स्कूलों में तालाबंदी तक की नौबत आ रही है।
बघेल ने कर्मचारियों के वेतन और विभिन्न सरकारी विभागों में भुगतान से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कई कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है।
‘हर घर नल’ योजना को लेकर भी सवाल
बघेल ने केंद्र की हर घर नल योजना का जिक्र करते हुए राज्य में ठेकेदारों के कथित बकाया भुगतान का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि भुगतान लंबित होने से कई ठेकेदार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने तेंदूपत्ता भुगतान का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि आदिवासी समुदाय तक उनका पैसा समय पर नहीं पहुंच रहा है।
कांग्रेस सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
भूपेश बघेल ने अपनी सरकार के कार्यकाल का बचाव करते हुए किसान कर्जमाफी, धान खरीदी, लघु वनोपज की खरीद, राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन योजना जैसी योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने किसानों, गरीबों और आम लोगों तक आर्थिक लाभ पहुंचाने का काम किया। साथ ही कोरोना काल के दौरान रोजगार और अन्य सहायता योजनाओं को भी उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धि बताया।
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नकटी गांव मामले पर बोले भूपेश बघेल
इंटरव्यू में नकटी गांव का मुद्दा भी उठा। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि गरीबों के मकानों को हटाकर विधायकों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के विधायकों ने इस तरह की व्यवस्था का विरोध किया था। हालांकि, इस मुद्दे पर लगाए गए आरोपों के संबंध में संबंधित पक्ष का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
कांग्रेस संगठन को लेकर क्या बोले?
कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पार्टी ने करीब 24 हजार बूथों पर बूथ कमेटियां तैयार की हैं। उनका दावा है कि संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने का काम जारी है। उन्होंने कहा कि युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, NSUI के अलावा अनुसूचित जाति कांग्रेस, जनजाति कांग्रेस, किसान कांग्रेस और मछुआरा कांग्रेस जैसे संगठनों को भी विस्तार दिया गया है। उन्होंने कांग्रेस के संगठन में नए चेहरों को मौका दिए जाने का भी जिक्र किया और कहा कि अब कई ऐसे नेताओं को जिला कांग्रेस कमेटियों की जिम्मेदारी दी जा रही है, जिन्हें किसी पुराने गुट से जोड़कर नहीं देखा जाता।
BJP और कांग्रेस की संगठनात्मक शैली पर तुलना
भूपेश बघेल ने कांग्रेस और BJP के संगठनात्मक ढांचे की तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस में विचार-विमर्श और चुनाव की परंपरा रही है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर के बीच हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव का उदाहरण देते हुए पार्टी की आंतरिक चुनावी प्रक्रिया का उल्लेख किया। इसके विपरीत उन्होंने BJP और RSS की संरचना पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वहां निर्णय प्रक्रिया अधिक केंद्रीकृत है। उन्होंने RSS और उसकी विचारधारा को लेकर भी कई राजनीतिक टिप्पणियां कीं। ये उनके व्यक्तिगत राजनीतिक विचार हैं।
चुनावों में ‘नरेटिव’ की राजनीति का आरोप
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय बांग्लादेशी और रोहिंग्या जैसे मुद्दों को राजनीतिक नैरेटिव के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार से विधानसभा में आंकड़े मांगे गए, लेकिन उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही ऐसे मुद्दे राजनीतिक बहस में ज्यादा प्रमुख हो जाते हैं।
विपक्ष की सबसे बड़ी चुनौती क्या?
जब उनसे विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती के बारे में पूछा गया तो भूपेश बघेल ने कहा कि किसानों, युवाओं, महिलाओं, मजदूरों और छोटे व्यापारियों की समस्याएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके अनुसार सबसे बड़ी चुनौती लोकतंत्र और संविधान की रक्षा है। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती बनी रहना जरूरी है।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर जताई आपत्ति
भूपेश बघेल ने वन नेशन, वन इलेक्शन की चर्चा के बीच आरोप लगाया कि इसके पीछे भविष्य में “वन नेशन, वन पार्टी” जैसी व्यवस्था का खतरा हो सकता है। उन्होंने कई क्षेत्रीय दलों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि देश में विपक्षी और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को कमजोर किया जा रहा है। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आकलन है, जिसे स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं लिया जा सकता।
सनातन को लेकर क्या कहा?
इंटरव्यू में सनातन धर्म पर भी उनसे सवाल किया गया। भूपेश बघेल ने कहा कि उनके अनुसार सनातन का अर्थ सत्य, अहिंसा और लंबे समय से चली आ रही भारतीय परंपरा से जुड़ा है। उन्होंने BJP पर सनातन की अलग व्याख्या करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके अनुसार भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता ही देश की मूल पहचान है।
महादेव सट्टा मामले पर लगाए गंभीर आरोप
इंटरव्यू के सबसे चर्चित हिस्सों में से एक महादेव सट्टा मामले से जुड़ा रहा। भूपेश बघेल ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में इस मामले में कार्रवाई की थी। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में कई FIR दर्ज की गईं, लोगों की गिरफ्तारियां हुईं और बैंक खाते व इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए। बघेल ने मौजूदा सरकार पर भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और कथित “प्रोटेक्शन मनी” का आरोप लगाया। हालांकि, यह पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस इंटरव्यू के आधार पर नहीं की जा सकती।
बस्तर और नक्सलवाद पर सरकार को घेरा
बस्तर में नक्सलवाद पर भूपेश बघेल ने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान बस्तर में सड़क, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं और राशन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार इस योगदान को नजरअंदाज कर रही है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी भी तरह की नक्सली हिंसा का समर्थन नहीं करती।
युवा पीढ़ी को राजनीति में आने की सलाह
रैपिड फायर सेगमेंट में भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ को अपनी पहचान, संस्कृति, विविधता और भाईचारे से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत इसकी सामाजिक विविधता है। जब उनसे पूछा गया कि राजनीति में नहीं होते तो क्या करते, उन्होंने कहा कि खेती-किसानी ही उनका मुख्य काम है और आज भी वह खेती करते हैं। कांग्रेस के बारे में एक शब्द में उन्होंने इसे “विचारधारा” बताया।
युवा पीढ़ी के लिए उनका संदेश था कि ज्यादा से ज्यादा अच्छे लोगों को राजनीति में आना चाहिए। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचार का हवाला देते हुए कहा कि अच्छा संविधान और कानून तभी प्रभावी होंगे, जब उन्हें लागू करने वाले लोग भी अच्छे हों।
