‘पत्नी से बचा लो…’ 6 महीने में 12 हजार पुरुषों ने लगाई गुहार! MP में पतियों की मौत के आंकड़ों ने उड़ाए होश
इंदौर। मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की चर्चा तो अक्सर होती है लेकिन हाल ही में सामने आए आंकड़े एक चौंकाने वाली और चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। पतियों की हत्या के मामले में मध्य प्रदेश पूरे देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। वर्ष 2026 के शुरुआती 6 महीनों के भीतर ही प्रदेश में पतियों की हत्या के 36 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
पति-पत्नी के रिश्तों में कड़वाहट, पारिवारिक विवाद और घरेलू हिंसा के चलते पतियों की जान जाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इन भयावह आंकड़ों के सामने आने के बाद अब पुरुष अधिकार संगठन उग्र हो गए हैं और देश में ‘राष्ट्रीय पुरुष आयोग’ के गठन की मांग तेज होती जा रही है।
हेल्पलाइन पर गूंज रही पुरुषों की चीख: 6 महीने में आई 12 हजार से अधिक कॉल्स
पुरुष अधिकार संगठनों के पास मदद के लिए आने वाले फोन कॉल्स का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2025 में प्रदेश भर से पुरुष हेल्पलाइन पर जहां 8,108 कॉल दर्ज की गई थीं, वहीं 2026 में सिर्फ जून तक यह आंकड़ा बढ़कर 12,577 कॉल पहुंच गया है।
देश के आंकड़े की बात करें तो साल 2025 में देश भर से 58,289 कॉल्स आई थीं, जो 2026 के शुरुआती 6 महीनों में ही बढ़कर 87,969 हो गई हैं।
संगठनों का दावा है कि इन 6 महीनों में पत्नियों व ससुराल पक्ष की प्रताड़ना से तंग आकर मध्य प्रदेश में 232 पुरुषों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया है।
‘राष्ट्रीय पुरुष आयोग’ की मांग
पुरुषों पर हो रहे अत्याचार हत्या और फर्जी मुकदमों से सुरक्षा की गुहार को लेकर अब देश भर में चर्चा होने लगी है। वहीं आंदोलन से जुड़े संगठनों का दावा है कि वर्तमान में देश के 70 से अधिक एनजीओ और 10 से 12 हजार एक्टिविस्ट इस मुहिम से जुड़ चुके हैं।
हेल्पलाइन पर मदद मांगने वाले अधिकांश पुरुषों का कहना होता है कि उन्हें पत्नी और ससुराल पक्ष के शारीरिक व मानसिक अत्याचारों से बचाया जाए।
संगठनों का तर्क है कि जब महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के लिए ‘महिला आयोग’ मौजूद है, तो पुरुषों की सुनवाई और संरक्षण के लिए ‘राष्ट्रीय पुरुष आयोग’ का गठन क्यों नहीं किया जा रहा?
