Plastic Notes India: RBI ने जारी किया ग्लोबल टेंडर, जानिए कब तक हो सकता है पूरा रोलआउट

कागजी नोट जल्दी खराब होने की समस्या से निजात, RBI ने पॉलिमर नोट छापने के लिए मांगी बोली

Plastic notes India RBI global tender : देश में एक बार फिर से नोटबंदी (Demonetisation) लागू हो सकती है… अरे रुकिए जरा! 2016 वाली नोटबंदी लागू नहीं होने जा रही है। दरअसल मोदी सरकार कागज के नोट की जगह अब प्लास्टिक के नोट लाने की तैयारी कर रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्लास्टिक नोट छापने के लिए ग्लोबल टेंडर भी जारी कर दिया है। मार्केट में सबसे पहले 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट आएंगे। यह देश की मुद्रा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव है।

भारतीय रिजर्व बैंक की नोट छापने वाली विंग BRBNMPL ने प्लास्टिक के नोट बनाने के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला है। कंपनी ने दुनियाभर की कंपनियों से पॉलिमर शीट बनाने और सप्लाई करने के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) मांगी है। EOI के तहत बोली जमा करने के लिए 18 अगस्त तक की लास्ट डेट तय की गई है।

 क्यों आ रहे हैं प्लास्टिक नोट?

बता दें कि कागज के नोट जल्दी खराब हो जाते हैं। साथ ही बड़ी आसानी से फट भी जाते हैं। इसे देखते हुए देश में प्लास्टिक के नोट की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब भारतीय रिजर्व बैंक ने नोट बनाने के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला है। शुरुआती चरण में 10 और 20 रुपये के नोट पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किए जा सकते हैं।

बाद में अन्य मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोट भी जारी हो सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि प्लास्टिक नोटों का फुल-स्केल रोलआउट साल 2027 से शुरू हो सकता है। यानी अगले साल देशभर में प्लास्टिक के नोट चलन में आ जाएंगे।

 कागजी नोटों का क्या होगा?

आपके मन में यह सवाल भी आ सकता है कि पुराने नोटों का क्या होगा, जो कागज के हैं। पॉलिमर नोटों के आने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट बंद हो जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, RBI ने भी यही स्पष्ट किया है। बाजार में पहले से मौजूद कागजी बैंक नोट पूरी तरह से वैध (Legal Tender) बने रहेंगे और वे प्रचलन (Circulation) में जारी रहेंगे। प्लास्टिक नोट केवल एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में सिस्टम में शामिल किए जाएंगे।

प्लास्टिक नोटों के फायदे

  • लंबी उम्र: ये कागज के नोटों की तुलना में ढाई से चार गुना ज्यादा चल सकते हैं।
  • पानी प्रतिरोधी: ये पानी से जल्दी खराब नहीं होते, आसानी से फटते नहीं हैं और गंदगी भी कम पकड़ते हैं।
  • स्वच्छ: कई शोधों में पाया गया है कि इनकी सतह पर बैक्टीरिया भी कम टिकते हैं।
  • सुरक्षा: इनकी पारदर्शी विंडो और आधुनिक सुरक्षा फीचर इन्हें नकली बनाना बेहद कठिन बना देते हैं।

 दुनिया में कहां-कहां चल रहे प्लास्टिक के नोट?

ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में सबसे पहले पॉलिमर नोट शुरू किए और बाद में पूरी करेंसी बदल दी गई। इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई समेत 40 से ज्यादा देशों ने इन्हें अपनाया। इन देशों का अनुभव बताता है कि शुरुआत में लागत ज्यादा होती है, लेकिन लंबे समय में नोट ज्यादा टिकाऊ साबित होते हैं।

यह भारत की मुद्रा प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

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