न शिक्षा व्यवस्था पर बात… न महंगाई पर जवाब, लेकिन सरकार का ‘वंदे मातरम्’ बिल तैयार!
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े एक अहम संशोधन विधेयक को पेश करने की तैयारी में है। प्रस्तावित विधेयक के तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करने या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया गया है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस विधेयक को सबसे पहले राज्यसभा में पेश कर सकते हैं।
सरकार का दावा- राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा जरूरी
सरकार का कहना है कि जिस तरह राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को कानूनी संरक्षण प्राप्त है, उसी प्रकार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी समान सम्मान मिलना चाहिए। प्रस्तावित कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है, उसके गायन में बाधा डालता है या सार्वजनिक कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। प्रस्ताव में तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान शामिल है।
विपक्ष और आलोचकों ने उठाए प्राथमिकताओं पर सवाल
प्रस्तावित विधेयक को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्ष और कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संसद के सामने महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जनसरोकारों से जुड़े कई अहम मुद्दे मौजूद हैं। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता इस विधेयक को बनाने पर क्यों है, इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का आरोप है कि सरकार भावनात्मक मुद्दों को अधिक महत्व दे रही है, जबकि सरकार इन आरोपों से सहमत नहीं है।
1971 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव
लोकसभा सचिवालय की सूची के अनुसार यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन से संबंधित है। यदि संसद इसे मंजूरी देती है, तो राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जुड़े मामलों में नए कानूनी प्रावधान लागू होंगे।
मानसून सत्र में गरमाएगी सियासत
20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में इस विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। जहां सरकार इसे राष्ट्रीय सम्मान का विषय बता रही है, वहीं विपक्ष इसके समय, उद्देश्य और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने की तैयारी में है।
