क्या पानी पर होगा भारत-पाक युद्ध? ख्वाजा आसिफ की भारत को खुली धमकी

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की सख्ती, पाकिस्तान का आंतरिक जल संकट और बार-बार की धमकियां

 

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में भारत को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा को गंभीर खतरा महसूस हुआ तो इस्लामाबाद सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

उनके अनुसार पानी अब केवल संसाधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है।

 

सिंधु जल संधि पर विवाद

यह बयान 1960 की Indus Waters Treaty (सिंधु जल संधि) को लेकर बढ़े तनाव के बीच आया है।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित कर दिया है।

स्पष्ट है कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन और वित्तपोषण बंद नहीं करता तब तक यह कदम लागू रहेगा।

 भारत का मजबूत रुख

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने हाल ही में कहा था कि वर्ष 2028 तक पाकिस्तान की ओर जाने वाले सिंधु नदी तंत्र के पानी को पूरी तरह रोकने की क्षमता भारत विकसित कर लेगा। इस बयान के बाद पाकिस्तान से प्रतिक्रियाएं आई हैं।

 

 ख्वाजा आसिफ का आरोप

ख्वाजा आसिफ ने भारत पर पानी को “रणनीतिक हथियार” की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने दावा किया कि भारत चिनाब नदी के प्रवाह में बदलाव कर रहा है और आवश्यक हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा नहीं कर रहा।

हालांकि खुद उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले एक वर्ष में हुए विकासक्रमों की पूरी जानकारी उनके पास नहीं है।

 

सिंधु जल संधि: इतिहास और शुरुआत

सिंधु जल संधि 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता से भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हुई थी। विभाजन के बाद पंजाब की नहर प्रणाली बंट जाने से उत्पन्न विवाद को सुलझाने के लिए यह संधि बनाई गई थी।

 

संधि के मुख्य प्रावधान

पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलुज): भारत को पूर्ण अधिकार

पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब): पाकिस्तान को मुख्य अधिकार, भारत को सीमित उपयोग की अनुमति

Permanent Indus Commission का गठन विवाद सुलझाने के लिए

 

संधि कैसे बिगड़ी?

संधि बिगड़ने की असली वजह पाकिस्तान का बार-बार भारत पर आतंकी हमले करना है।

1947 से लेकर अब तक पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण, 1965 का युद्ध, 1971 का युद्ध, 1999 का कारगिल युद्ध, 2008 का मुंबई 26/11 हमला, पुलवामा, उरी और हालिया पहलगाम हमला जैसे दर्जनों हमलों को बढ़ावा दिया है।

प्रत्येक हमले के बाद पाकिस्तान इनकार करता है, लेकिन ISI और सेना का समर्थन सबूतों में सामने आता रहता है। भारत ने संधि निलंबित करते हुए साफ संदेश दिया है जब तक आतंकवाद बंद नहीं होता, संधि suspended रहेगी।

 

पाकिस्तान का गहराता जल संकट

पाकिस्तान में जल संकट मुख्य रूप से आंतरिक mismanagement और प्रांतीय लूट का परिणाम है। सिंध और बलूचिस्तान में लाखों लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं। सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार कई प्रमुख नहरों में पानी की उपलब्धता में 20 से 80 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।

सिंध के अधिकारी पंजाब पर तय हिस्से से अधिक पानी लेने का आरोप लगाते हैं।  1991 Water Apportionment Accord का लगातार उल्लंघन हो रहा है।

 

पाकिस्तान की हाइपोक्रिसी

पाकिस्तान खुद सिंध को पानी नहीं दे पा रहा है, प्रांतीय भेदभाव और भ्रष्टाचार चरम पर है, फिर भी भारत पर आरोप लगा रहा है।

पुरानी नहरें, भूजल का अत्यधिक दोहन, बाढ़ प्रबंधन की कमी और जलवायु परिवर्तन के प्रति कोई ठोस योजना न होना पाकिस्तान की असली समस्या है।

भारत दशकों तक संधि का सम्मान करता रहा।  अब अपने सूखाग्रस्त राज्यों के हित में नई परियोजनाएं, जल भंडारण और डायवर्शन पर तेजी से काम कर रहा है।  यह कदम पूरी तरह कानूनी और नैतिक है।

 

ख्वाजा आसिफ की धमकी पाकिस्तान की कमजोरी को छुपाने का प्रयास है। पानी का विवाद भारत की वजह से नहीं, बल्कि पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन और खराब प्रबंधन का परिणाम है।

यदि पाकिस्तान आतंकवाद की नीति छोड़कर आंतरिक सुधार नहीं करता तो जल संकट, आर्थिक पतन और क्षेत्रीय अलगाव और गहराएगा।  भारत अब संयम की नीति छोड़कर अपने राष्ट्रीय हितों की मजबूती से रक्षा कर रहा है।

 

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