छत्तीसगढ़ में जल्द लागू होगा धर्मांतरण विरोधी कानून, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दी जानकारी

रायपुर, 25 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में अवैध और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कानून लाने की अंतिम तैयारी में है। उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार ने धर्मांतरण से संबंधित कानून का मसौदा तैयार कर लिया है, जो वर्तमान में परीक्षण (स्क्रूटनी) की प्रक्रिया से गुजर रहा है। परीक्षण पूरा होते ही इसे विधानसभा में पेश कर प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा।

 

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्य में पहले से छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 लागू है, लेकिन बदलते समय और बढ़ते मामलों को देखते हुए इसमें आवश्यक संशोधन और मजबूती की जरूरत थी। नए कानून का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है, जिसमें लालच, दबाव, धोखाधड़ी या किसी भी अनैतिक तरीके से धर्मांतरण कराने वालों पर कड़ी कार्रवाई के प्रावधान शामिल किए गए हैं।

 

विजय शर्मा ने जोर देकर कहा, “नए कानून के लागू होने से धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट और पारदर्शी हो जाएगी। सरकार का उद्देश्य समाज में सौहार्द बनाए रखना, कानून का दुरुपयोग रोकना और ऐसे मामलों में सख्ती बरतना है।” उन्होंने बताया कि कानून के अंतिम स्वरूप पर सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की जा रही है, ताकि लागू होने के बाद कोई कानूनी अस्पष्टता न रहे।

 

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में बस्तार, जशपुर, कांकेर जैसे आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें ‘चंगाई सभाओं’ (फेथ हीलिंग मीटिंग्स) के जरिए प्रलोभन देने के आरोप लगे हैं। सरकार ने इन मुद्दों पर गंभीरता दिखाते हुए कानून को और सख्त बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। शीतकालीन सत्र में इस संबंध में विधेयक पेश करने की चर्चा पहले भी हो चुकी है, लेकिन अब मसौदा अंतिम चरण में पहुंच गया है।

 

सरकार का मानना है कि यह कदम धर्म की स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए जबरन या अनुचित तरीके से होने वाले धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा। नए कानून के लागू होने के बाद ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन को मजबूत कानूनी आधार मिलेगा।

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