बिहार में एनडीए की प्रचंड बढ़त: पटना से दिल्ली तक जश्न का माहौल; कुछ ही देर बाद पीएम मोदी करेंगे संबोधन

बिहार विधानसभा चुनाव के रुझानों में एनडीए की अभूतपूर्व बढ़त साफ तौर पर दिखाई दे रही है। शुरुआती आंकड़ों से स्पष्ट है कि बीजेपी–जेडीयू गठबंधन भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करने जा रहा है। इसी तेजी से बदलते राजनीतिक माहौल के बीच दिल्ली से लेकर पटना तक जश्न का माहौल बन गया है।

पीएम मोदी शाम 6 बजे करेंगे कार्यकर्ताओं को संबोधित

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 6 बजे बीजेपी मुख्यालय पहुंचेंगे और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे।
बीजेपी दफ्तर में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह दिखाई दे रहा है।

जानकारी यह भी सामने आ रही है कि संबोधन के दौरान पीएम मोदी विपक्ष पर कड़े हमले कर सकते हैं—

खासकर कांग्रेस और आरजेडी पर

साथ ही राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ वाले बयान पर भी पलटवार किए जाने की संभावना है

इधर, जीत के आधिकारिक ऐलान से पहले ही बीजेपी मुख्यालय में लिट्टी-चोखा भोज का आयोजन शुरू कर दिया गया है।

सीटों के रुझान में एनडीए की जबरदस्त बढ़त

खबर लिखे जाने तक स्थिति इस प्रकार है—

बीजेपी: 96 सीटों पर आगे

जेडीयू: 84 सीटों पर आगे

लोजपा (रामविलास): 19 सीटों पर आगे

राष्ट्रीय लोक मोर्चा: 4 सीटों पर आगे

एचएएम (मांझी): 5 सीटों पर आगे

आरजेडी: 24 सीटों पर आगे

कांग्रेस: 2 सीटों पर आगे

सीपीआईएमएल: 1 सीट

सीपीएम: 1 सीट

वहीं सीपीआई 0 पर सिमट गई है, जिससे साफ है कि विपक्षी दल इस बार बेहद कमज़ोर प्रदर्शन करते दिख रहे हैं। एनडीए की सभी पार्टियों ने शानदार प्रदर्शन किया है—

जेडीयू ने मजबूत वापसी की

चिराग पासवान और जीतनराम मांझी का प्रदर्शन लोकसभा जैसा ही दमदार रहा

नीतीश–मोदी की जोड़ी पर जनता का भरोसा, महिलाओं का समर्थन बना गेम चेंजर

इस चुनाव परिणाम ने एक बात स्पष्ट कर दी है—बिहार की जनता ने फिर एक बार नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की जोड़ी को पसंद किया है।

चुनाव आयोग के ताज़ा रुझानों के अनुसार, एनडीए 200 से ज्यादा सीटों की ओर बढ़ रहा है, जो एकतरफा जीत को दर्शाता है।

सूत्रों के अनुसार, महिला कल्याण योजनाओं ने इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाई। महिलाओं ने एनडीए के पक्ष में भारी मतदान किया, जिससे गठबंधन को बड़ी बढ़त मिली।

दूसरी ओर, महागठबंधन 30 सीटों के आसपास सिमटता नजर आ रहा है।
तेजस्वी यादव और राहुल गांधी द्वारा उठाए गए “वोट चोरी” जैसे मुद्दों का कोई असर मतदाताओं पर नहीं दिखा।

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