जनगणना 2026 से पहले बड़ी चुनौती: छत्तीसगढ़ के 708 गांव गायब, मांगा गया नगरीकरण का गजट

छत्तीसगढ़ के 708 गांव गायब

छत्तीसगढ़ के 708 गांव गायब

देश में अगले साल से नई जनगणना 2026 होने जा रही है। इसके लिए भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण के तहत एफएसयू (फर्स्ट स्टेज यूनिट) चयन की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन इस दौरान पता चला कि छत्तीसगढ़ राज्य के 708 गांव ग्रामीण फ्रेम में उपलब्ध नहीं हैं। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इन गांवों की अनुपलब्धता से सर्वेक्षण में ग्राम प्रतिनिधित्व में आंशिक त्रुटि हो सकती है।

नोटिफिकेशन के लिए राज्य सरकार से मांगी गई जानकारी

स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से गजट नोटिफिकेशन की मांग की है। मंत्रालय के उप निदेशक ने राज्य सरकार को पत्र जारी कर कहा कि एफएसयू चयन प्रक्रिया को सटीक बनाने के लिए इस नोटिफिकेशन की समीक्षा आवश्यक है।

एफएसयू का महत्व और चयन प्रक्रिया

जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण में एफएसयू (First Stage Unit) का मतलब “प्रथम चरण की इकाई” होता है। यह बहु-चरणीय नमूनाकरण प्रक्रिया का पहला चरण है, जिसमें सर्वेक्षण के लिए सबसे बड़ी भौगोलिक इकाइयों का चयन किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में एफएसयू आमतौर पर कोई गाँव या पंचायत वार्ड होता है। शहरी क्षेत्रों में इसे अर्बन फ्रेम सर्वे (UFS) कहा जाता है।

चयन प्रक्रिया

स्तरीकरण (Stratification) – पूरे सर्वेक्षण क्षेत्र को विभिन्न स्तरों में बांटा जाता है। प्रत्येक स्तर से निश्चित संख्या में एफएसयू चुने जाते हैं। चयन के लिए व्यवस्थित नमूनाकरण और प्रतिस्थापन जैसी तकनीकें अपनाई जाती हैं।

रायपुर और अन्य क्षेत्रों के कार्यालयों को निर्देश

केंद्र के पत्र के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर और सरगुजा के क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि तीन दिनों के भीतर नोटिफिकेशन की कॉपी उपलब्ध कराई जाए।

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