अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन्स की करारी हार: क्या दोनों सदनों में बहुमत के बाद डेमोक्रेट्स रोक पाएंगे ट्रंप का ईरान युद्ध?

वॉशिंगटन। हाल ही में संपन्न हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के परिणामों ने अमेरिकी राजनीति की दिशा बदल दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को अमेरिकी संसद के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में भारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने ऐतिहासिक वापसी करते हुए दोनों सदनों में पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है।

इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद अब वॉशिंगटन से लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों तक सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने के बाद डेमोक्रेट्स राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य संघर्ष को तुरंत रोकने के लिए विवश कर सकते हैं?

चुनाव में क्यों हारी रिपब्लिकन पार्टी?

चुनाव नतीजों का विश्लेषण स्पष्ट करता है कि अमेरिकी मतदाताओं में बढ़ती महंगाई, लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था और ईरान के साथ लंबे खिंचते सैन्य संघर्ष को लेकर गहरा आक्रोश था। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दामों ने आम नागरिकों का बजट बिगाड़ दिया था।

हार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि ईरान युद्ध और उसके चलते उपजी आर्थिक कठिनाइयों ने रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ जनादेश तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाई। जनता ने इस खर्चीले संघर्ष और अनिश्चितता के खिलाफ अपना असंतोष जताते हुए डेमोक्रेट्स के पक्ष में मतदान किया।

क्या डेमोक्रेट्स सीधे तौर पर युद्ध रोक सकते हैं?

अमेरिकी संवैधानिक ढांचे और शक्ति-संतुलन के नियमों को समझें, तो इसका सीधा उत्तर ‘नहीं’ है। केवल संसद के दोनों सदनों में साधारण बहुमत होने मात्र से डेमोक्रेट्स राष्ट्रपति ट्रंप को तुरंत युद्ध रोकने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं कर सकते। इसके पीछे मुख्य संवैधानिक और व्यावहारिक बाधाएं निम्नलिखित हैं:

कमांडर-इन-चीफ की संवैधानिक शक्ति: अमेरिकी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति देश का मुख्य कार्यकारी होने के साथ-साथ सशस्त्र बलों का ‘कमांडर-इन-चीफ’ होता है। विदेश नीति और सक्रिय सैन्य अभियानों के संचालन का सीधा अधिकार राष्ट्रपति के पास सुरक्षित है, जिसे संसद सीधे तौर पर अपने हाथ में नहीं ले सकती।

राष्ट्रपति का वीटो अधिकार (Veto Power): यदि डेमोक्रेट्स कांग्रेस में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने या युद्ध समाप्त करने का कोई कानून या प्रस्ताव पारित भी कर देते हैं, तो राष्ट्रपति ट्रंप के पास उस पर वीटो लगाने का अधिकार है। राष्ट्रपति के वीटो को निष्प्रभावी करने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। मौजूदा समय में डेमोक्रेट्स के पास दोनों सदनों में बढ़त तो है, लेकिन दो-तिहाई का यह विशेष बहुमत जुटाना उनके लिए लगभग असंभव है।

फंडिंग रोकने का राजनीतिक जोखिम (Power of the Purse): अमेरिकी संविधान कांग्रेस को बजट और फंड आवंटन पर नियंत्रण का अधिकार देता है। सैद्धांतिक रूप से संसद युद्ध के लिए वित्तीय मदद रोक सकती है। हालांकि, व्यावहारिक रूप से ऐसा कदम उठाना विपक्ष के लिए बेहद जोखिम भरा माना जाता है। युद्ध के बीच में सैन्य बजट रोकने पर प्रशासन इसे “सीमा पर तैनात सैनिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़” बताकर पूरा राजनीतिक ठीकरा डेमोक्रेट्स के सिर फोड़ सकता है।

डेमोक्रेट्स के पास अब क्या विकल्प हैं?

संवैधानिक सीमाओं के बावजूद, दोनों सदनों का नियंत्रण हाथ में आने से डेमोक्रेटिक पार्टी के पास व्हाइट हाउस पर दबाव बनाने के कई शक्तिशाली राजनीतिक और विधायी हथियार आ गए हैं:

संसदीय जांच और समितियां: दोनों सदनों में बहुमत के बाद अब प्रमुख समितियों जैसे फॉरेन रिलेशंस और आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की अध्यक्षता डेमोक्रेट्स के पास होगी। वे ईरान युद्ध की शुरुआत, सामरिक रणनीतियों, वित्तीय खर्चों और खुफिया विफलताओं पर उच्चस्तरीय संसदीय जांच बिठा सकते हैं। व्हाइट हाउस के अधिकारियों को तलब कर सार्वजनिक रूप से सवाल-जवाब किए जा सकेंगे, जिससे प्रशासन पर नैतिक व राजनीतिक दबाव बढ़ेगा।

वॉर पावर्स एक्ट (War Powers Act) का उपयोग: कांग्रेस वॉर पावर्स रेजोल्यूशन के तहत राष्ट्रपति के सैन्य अधिकारों को सीमित करने वाले प्रस्ताव ला सकती है। भले ही ट्रंप इसे वीटो कर दें, लेकिन यह कदम अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अमेरिकी जनता के बीच यह संदेश स्थापित करेगा कि राष्ट्रपति बिना जनादेश और संसद की सहमति के युद्ध चला रहे हैं।

आगामी रणनीतियों के लिए घेराबंदी: चुनाव में मिले स्पष्ट जनादेश का हवाला देकर डेमोक्रेट्स सार्वजनिक मंचों पर ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति की घेराबंदी करेंगे, जिससे प्रशासन को अपनी युद्धक नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है।

आगे की राह: टकराव का नया दौर

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों ने व्हाइट हाउस को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अमेरिकी जनमानस ईरान के साथ चल रहे सैन्य टकराव के पक्ष में नहीं है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप की संवैधानिक शक्तियों और वीटो विशेषाधिकार के चलते युद्ध तुरंत रुकने की संभावना कम है, लेकिन संसद में डेमोक्रेट्स के पूर्ण नियंत्रण ने व्हाइट हाउस की राह बेहद कठिन कर दी है।

आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन और नई कांग्रेस के बीच बजट, युद्ध नीति और जवाबदेही को लेकर एक बड़ा संवैधानिक व राजनीतिक टकराव देखने को मिलेगा, जो आने वाले समय में अमेरिकी विदेश नीति का भविष्य तय करेगा।

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