Amit Shah On UCC: 2029 से पहले 21 राज्यों में लागू होगा UCC; अमित शाह ने बताया सरकार का बड़ा प्लान
Amit Shah On UCC: देश में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी आगे की रणनीति का संकेत दे दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नागरिकों के लिए समान कानून की व्यवस्था करना महज राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। उत्तराखंड में UCC के लागू होने को सरकार इसके एक उदाहरण के तौर पर देख रही है।
सरकार की योजना आने वाले वर्षों में इस व्यवस्था को देश के कई और राज्यों तक ले जाने की है। अमित शाह के मुताबिक, 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 21 राज्यों में UCC लागू किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
21 राज्यों में UCC लागू करने की तैयारी
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां UCC को लागू किया जा चुका है। इसके बाद अब दूसरे राज्यों में भी इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और असम जैसे राज्यों में UCC को लेकर ड्राफ्ट और कानूनी तैयारियों पर काम चल रहा है।
सरकार का उद्देश्य नागरिकों से जुड़े निजी कानूनों में एकरूपता लाना है, ताकि धर्म के आधार पर अलग-अलग कानूनी प्रावधानों की जगह समान नागरिक नियम लागू किए जा सकें।
विवाह और तलाक के नियमों पर पड़ेगा प्रभाव
UCC के लागू होने से व्यक्तिगत कानूनों के तहत आने वाले कई मामलों में बदलाव की संभावना है। विवाह की न्यूनतम उम्र, तलाक की प्रक्रिया, बच्चों को गोद लेने और पैतृक संपत्ति में अधिकार जैसे विषय समान नागरिक कानून के दायरे में आ सकते हैं।
केंद्र सरकार का मानना है कि समान नियम होने से नागरिक अधिकारों में एकरूपता आएगी। खासकर महिलाओं के विवाह, तलाक और संपत्ति से जुड़े अधिकारों को अधिक स्पष्ट कानूनी संरक्षण मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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ST समुदायों की परंपराओं पर क्या होगा?
UCC को लेकर जनजातीय समाज की परंपराओं और अधिकारों को लेकर भी चर्चा होती रही है। अमित शाह ने कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदायों की पारंपरिक व्यवस्थाओं को कानून के दायरे में विशेष संरक्षण दिया जाएगा।
पूर्वोत्तर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक अधिकारों को UCC से बाहर रखने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य जनजातीय समाज की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना है।
गोवा और उत्तराखंड का दिया उदाहरण
विपक्ष की ओर से UCC को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच अमित शाह ने गोवा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वहां लंबे समय से कॉमन सिविल कोड की व्यवस्था लागू है। इसके साथ ही उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद सामने आए अनुभव का भी उल्लेख किया।
गृह मंत्री ने संविधान के नीति निर्देशक तत्वों का हवाला देते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता की अवधारणा संविधान निर्माताओं की सोच का हिस्सा रही है। केंद्र सरकार इसे उसी संवैधानिक भावना के अनुरूप आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
देश की कानूनी व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी
अगर सरकार की प्रस्तावित योजना के अनुसार अलग-अलग राज्यों में UCC लागू होता है, तो व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े कई क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिल सकता है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में समान नियमों की व्यवस्था देश के बड़े हिस्से में लागू हो सकती है।
हालांकि, अलग-अलग राज्यों में इसके लिए कानूनी प्रक्रिया और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कदम उठाना होगा। ऐसे में आने वाले समय में UCC देश की राजनीति और कानून से जुड़े प्रमुख मुद्दों में बना रह सकता है।
