राजनांदगांव में 10 करोड़ की सड़क निर्माण की खुली पोल, पहली बारिश में उखड़ी नई सड़क, ठेकेदार पर कार्रवाई की तैयारी

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में हाल ही में 10 करोड़ रुपये की लागत से बनी 42 सड़कों की हकीकत पहली ही बारिश में उजागर हो गई। बारिश शुरू होते ही कई नई सड़कें जगह-जगह से उखड़ने लगीं, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर मानव मंदिर चौक से दुर्गा चौक तक बनी नई सड़क महज एक महीने में ही जवाब दे गई।

पहली बारिश में ही ढह गई निर्माण की साख

मानव मंदिर चौक से दुर्गा चौक तक बनी यह सड़क बारिश के पहले ही दिन से उखड़ने लगी। निर्माण के एक माह के भीतर ही गड्ढे और दरारें दिखने लगीं। गांधी चौक से ब्राह्मणपारा चौक के पास सड़क की हालत सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। इससे साफ है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया या निर्माण प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती गई।

नगर निगम कमिश्नर ने दिए जांच के निर्देश

सड़कों की बिगड़ती हालत पर नगर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने कहा कि जहां-जहां इस तरह की शिकायतें मिलेंगी, वहां तुरंत परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आयुक्त का यह बयान जनता में आक्रोश को शांत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन लोगों की मांग है कि सिर्फ कार्रवाई की बात नहीं, सख्त कदम उठाए जाएं।

भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सवाल

राजनांदगांव में एक तरफ जहां करोड़ों खर्च कर सड़कों को बनवाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उनका इतनी जल्दी खराब हो जाना शासन और प्रशासन दोनों के कामकाज पर सवाल खड़े करता है। यह पूरा मामला सरकारी धन के गलत इस्तेमाल और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

जनता का आक्रोश और सोशल मीडिया पर बहस

शहर में इन सड़कों को लेकर स्थानीय लोग खासे नाराज हैं। सोशल मीडिया पर भी कई नागरिकों ने वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए सवाल उठाए हैं कि जब सड़कें एक महीने भी नहीं टिक पा रही हैं, तो इसका जिम्मेदार कौन है? क्या ठेकेदारों की मिलीभगत से काम चल रहा है या प्रशासनिक लापरवाही इसके पीछे है?

क्या होगी अगली कार्रवाई?

अब सबकी निगाहें नगर निगम और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वाकई दोषी ठेकेदारों पर ठोस कार्रवाई की जाएगी या यह मामला भी बाकी घोटालों की तरह फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।

अगर इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक रंग भी पकड़ सकता है।

राजनांदगांव में पहली बारिश में ही उखड़ी करोड़ों की सड़कें यह साफ दर्शा रही हैं कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता और गुणवत्ता की भारी कमी है। जनता अब जवाब और न्याय चाहती है, सिर्फ आश्वासन नहीं।

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