पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन, छत्तीसगढ़ ने खोया अपना अनमोल रत्न
रायपुर एम्स में सुबह 3:15 बजे ली अंतिम सांस, लंबे समय से थीं बीमार
रायपुर। प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का रविवार सुबह रायपुर एम्स अस्पताल में निधन हो गया है। उन्होंने 72 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। वह लंबे वक्त से बीमार चल रही थीं। रविवार सुबह करीब 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बड़ी क्षति है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर के एम्स अस्पताल पहुंचकर डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिमंडल के कई सदस्य भी मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत लोककलाकार को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।
पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाने वाली कलाकार
डॉ. तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को अपनी दमदार आवाज़, अभिनय और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने जीवंत बनाया। उनकी कला ने भारत के साथ-साथ एशिया, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों के दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशेष सम्मान मिला।
यह उन लाखों प्रशंसकों के लिए शोक का कारण है, जो उनकी कला से जुड़े थे।
देश के सर्वोच्च सम्मानों से हुईं सम्मानित
भारतीय लोककला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नृत्य शिरोमणि, कला शिरोमणि समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। विभिन्न विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डी.लिट. (डॉक्टरेट) की उपाधि से भी सम्मानित किया था।
लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति
डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा और अथक साधना से पंडवानी को गांव की चौपाल से निकालकर विश्व मंच तक पहुंचाया। उनके जाने से लोककला जगत ने अपना एक अमूल्य नक्षत्र खो दिया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने की घोषणा की है। पूरे छत्तीसगढ़ में शोक का माहौल है और लोककला प्रेमी अपनी इस अमूल्य विरासत को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
यह छत्तीसगढ़ लोककला के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है।
