SC Notice to Boney Kapoor: श्रीदेवी की करोड़ों की प्रॉपर्टी पर फिर कानूनी पेंच! बोनी कपूर, जाह्नवी-खुशी को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

SC Notice to Boney Kapoor

SC Notice to Boney Kapoor: श्रीदेवी की प्रॉपर्टी को लेकर फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

SC Notice to Boney Kapoor: दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी के परिवार से जुड़ा चेन्नई की एक प्रॉपर्टी का पुराना विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रोड्यूसर बोनी कपूर और उनकी बेटियों जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर को नोटिस जारी किया है। विवादित संपत्ति चेन्नई के शोलिंगनल्लूर में स्थित है और इसका क्षेत्रफल करीब 2.70 एकड़ बताया गया है।

यह मामला उस जमीन के एक हिस्से पर दावे से जुड़ा है, जिसको लेकर M.C. शिवकामी और उनके भाई M.C. नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और अरुण पिल्लई की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक विवादित प्रॉपर्टी को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच विवाद को बातचीत या मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का सुझाव भी दिया है। इसके लिए हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज की देखरेख में मध्यस्थता कराने का प्रस्ताव रखा गया है।

मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को निर्धारित की गई है, जहां कोर्ट मध्यस्थता की प्रगति की समीक्षा करेगा।

क्या है श्रीदेवी की प्रॉपर्टी का विवाद?

विवादित संपत्ति चेन्नई के शोलिंगनल्लूर में सर्वे नंबर 1/1B पर स्थित है। मद्रास हाई कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, शिवकामी और उनके भाई ने खुद को स्वर्गीय एम.सी. चंद्रशेखरन का कानूनी वारिस बताते हुए संपत्ति में हिस्सा मांगा है।

याचिकाकर्ताओं ने प्रॉपर्टी को पांच बराबर हिस्सों में बांटने की मांग की है और अपने लिए पांचवें हिस्से का दावा किया है।

इसके अलावा उन्होंने 19 अप्रैल 1988 को राजेश्वरी, श्रीलता और श्रीदेवी के पक्ष में किए गए बिक्री विलेख यानी सेल डीड और संपत्ति से जुड़े बाद के लेन-देन को भी चुनौती दी है।

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पहले कपूर परिवार के पक्ष में आया था फैसला

इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने 20 अप्रैल को कपूर परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया था। हाई कोर्ट ने कपूर परिवार की रिविजन याचिका मंजूर करते हुए शिवकामी और उनके भाई द्वारा दायर सिविल मुकदमे को खारिज कर दिया था।

हाई कोर्ट के मुताबिक 1988 के प्रॉपर्टी लेन-देन को चुनौती देने वाला मामला लिमिटेशन यानी निर्धारित समय-सीमा के कारण आगे नहीं बढ़ सकता था। कोर्ट ने यह भी माना था कि उसके सामने रखी गई दलीलों के आधार पर वादियों के दावों में पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था।

इसके बाद शिवकामी और उनके भाई ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

कपूर परिवार की ओर से क्या दलील दी गई?

कपूर परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मूल प्रॉपर्टी लेन-देन वर्ष 1988 में हुआ था, जबकि मौजूदा मुकदमा 2025 में दायर किया गया।

वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि हाई कोर्ट ने कुछ जटिल सवालों पर विचार किया, जबकि उस स्तर पर मुख्य सवाल यह होना चाहिए था कि क्या मुकदमे को शुरुआती चरण में ही खारिज किया जाना चाहिए।

अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस और मध्यस्थता के सुझाव के बाद इस पुराने प्रॉपर्टी विवाद में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर है।

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