Sawan Somwar 2026 : सावन सोमवार पर भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां… भोलेनाथ हो सकते हैं नाराज

सावन सोमवार भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन व्रत, जलाभिषेक और पूजा के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छोटी-छोटी गलतियां भी पूजा के शुभ फल को प्रभावित कर सकती हैं।

 

 

Sawan Somwar 2026 : सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और इस पूरे महीने में आने वाले सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार के दिन भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा करने, व्रत रखने, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही वजह है कि देशभर के शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।

 

मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा जितनी श्रद्धा और भक्ति से की जाए, उतना ही अधिक पुण्य प्राप्त होता है। लेकिन कई बार जानकारी के अभाव में लोग पूजा के दौरान ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता। धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार इस दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

 

1. शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं

 

तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं, लेकिन शिव पूजा में तुलसी अर्पित करने की परंपरा नहीं है। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, सफेद पुष्प, चंदन और गंगाजल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

 

2. खंडित या सूखे बेलपत्र का प्रयोग न करें

 

बेलपत्र भगवान शिव को सबसे प्रिय माना गया है। पूजा में हमेशा ताजे, साफ और तीन पत्तियों वाले बेलपत्र का उपयोग करें। फटे हुए, सूखे या कीड़े लगे बेलपत्र अर्पित करना उचित नहीं माना जाता। बेलपत्र अर्पित करते समय उसका चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखने की परंपरा भी बताई जाती है।

 

3. हल्दी, सिंदूर और केतकी का फूल अर्पित करने से बचें

 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा में हल्दी, सिंदूर और केतकी के फूल का प्रयोग नहीं किया जाता। इसके पीछे पौराणिक कथाएं और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इसलिए पूजा में केवल वही सामग्री अर्पित करें, जो शिव आराधना में स्वीकार्य मानी गई हो।

 

4. शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करें

 

शिवलिंग की परिक्रमा करते समय जल निकासी वाले स्थान, जिसे सोमसूत्र कहा जाता है, उसे पार नहीं किया जाता। श्रद्धालु उसी स्थान से वापस लौटकर परिक्रमा पूरी करते हैं। इसे शिव पूजा का महत्वपूर्ण नियम माना गया है।

 

5. क्रोध, झूठ और अपशब्दों से दूर रहें

 

सिर्फ व्रत रखने या पूजा करने से ही नहीं, बल्कि मन और व्यवहार की पवित्रता भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है। सावन सोमवार के दिन क्रोध करना, किसी का अपमान करना, झूठ बोलना या कटु वचन कहना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। इस दिन शांत मन से भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।

 

6. व्रत के नियमों का पालन करें

 

यदि आपने सावन सोमवार का व्रत रखा है तो दिनभर सात्विक भोजन करें। लहसुन, प्याज, मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक चीजों से दूर रहें। कई श्रद्धालु केवल फलाहार करते हैं, जबकि कुछ लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं। अपनी क्षमता के अनुसार व्रत करें, लेकिन नियमों का पालन अवश्य करें।

 

7. जल्दबाजी में पूजा न करें

 

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग जल्दबाजी में पूजा कर लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा शांत मन, पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करनी चाहिए। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

 

इन बातों का भी रखें विशेष ध्यान

 

सावन सोमवार के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा में गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद जल, बेलपत्र, धतूरा, भस्म, चंदन और सफेद फूल अर्पित करें। शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

 

क्या मिलता है सावन सोमवार व्रत का फल?

 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार का व्रत रखने और भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अविवाहित लोगों को योग्य जीवनसाथी मिलने की कामना पूरी होने, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आने, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां कम होने और परिवार में खुशहाली बढ़ने की मान्यता भी प्रचलित है। हालांकि, यह सभी बातें धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं।

 

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