पर्चा गया, प्लेन लौटा, आयोग में धरना… MP में कांग्रेस के लिए सबसे बुरा दिन! भाजपा ने कैसे पलटा पूरा गेम?
नामांकन रद्द होते ही प्लेन रनवे से लौटा, 38 विधायकों की ‘कर्नाटक शिफ्ट’ फ्लॉप.. भाजपा के तीनों उम्मीदवार अब निर्विरोध की राह पर
Bhopal : राज्यसभा चुनाव से महज नौ दिन पहले मध्य प्रदेश की राजनीति में ऐसा ड्रामा देखने को मिला जो लंबे समय तक चर्चा में रहेगा। कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार और राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर ने रद्द कर दिया।
भाजपा की तीखी आपत्ति और हलफनामे में जानकारी छुपाने के आरोप ने पूरे समीकरण पलट दिए। नामांकन रद्द होते ही कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु ले जा रहा स्पेशल प्लेन टेक-ऑफ के तुरंत बाद वापस भोपाल एयरपोर्ट पर लैंड करा लिया गया।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद पार्टी ने भारत निर्वाचन आयोग का रुख किया, लेकिन यहां भी तीखा ड्रामा देखने को मिला। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं जयराम रमेश, के.सी. वेणुगोपाल, भूपेश बघेल, सचिन पायलट समेत अन्य नेताओं ने आयोग कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज करानी चाही, लेकिन किसी अधिकारी ने उनसे मुलाकात नहीं की।
अब भाजपा के तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट तीनों उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
पूरा मामला क्या है? नोटिस की वजह से नामांकन रद्द
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर भाजपा राज्य महासचिव राहुल कोठारी ने लिखित आपत्ति दर्ज कराई। आरोप था कि उन्होंने हलफनामे में तेलंगाना के हैदराबाद कोर्ट में लंबित एक मामले की जानकारी छिपाई है। यह प्राइवेट कंप्लेंट (SR No. 4472/2025, सेक्शन 223 BNSS) है, जिसमें मीनाक्षी को रेस्पॉन्डेंट नंबर 4 बनाया गया था। कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया था और उनके वकील ने जवाब भी दिया था।
रिटर्निंग ऑफिसर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद नामांकन रद्द करने का फैसला सुनाया। कांग्रेस का तर्क है कि कोई FIR या क्रिमिनल केस दर्ज नहीं है, सिर्फ परिवाद पर नोटिस से नामांकन रद्द नहीं होना चाहिए। लेकिन चुनाव नियमों के अनुसार, न्यायिक मामलों (pending cases, notices) की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है। चूक घातक साबित हुई। कांग्रेस ने इसे ‘षड्यंत्र’ बताया। मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि उनके साथ साजिश हुई है ।
आयोग पहुंचे कांग्रेस नेता, अधिकारी नहीं मिले
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने तुरंत दिल्ली कूच किया। जयराम रमेश, के.सी. वेणुगोपाल, भूपेश बघेल, सचिन पायलट और अन्य वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल निर्वाचन सदन पहुंचा। पार्टी का आरोप है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने 5:30 बजे समय दिया था, लेकिन आयोग कार्यालय उसी समय बंद हो जाता है।
भूपेश बघेल ने कहा, “निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता तार-तार हो गई है। अगर हम आरओ के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं तो आवेदन कहां देंगे? हमें धरने पर बैठना पड़ा, तब जाकर आवेदन लिया गया। हम कानूनी सलाह लेकर आगे बढ़ेंगे।”
के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, “हमें कानून के शासन पर भरोसा है। यह सीटों का मामला नहीं, लोकतंत्र का मामला है।”कांग्रेस नेताओं ने आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। पार्टी अब कानूनी रास्ता अपनाएगी और आगे की रणनीति तय करेगी।
CM मोहन यादव ने क्या कहा?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “कांग्रेस प्रत्याशी जानबूझकर आपराधिक रिकॉर्ड छिपाई है। उनके लोगों ने ही षड्यंत्रपूर्वक नामांकन पत्र में खामी रखी। कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए।” भाजपा नेताओं का कहना है कि नियमों का पालन हुआ है और सच्चाई की जीत हुई है।
प्लेन ड्रामा: क्रॉस वोटिंग के डर में कर्नाटक शिफ्ट फेल
नामांकन दाखिल होने के बाद कांग्रेस में खरीद-फरोख्त और क्रॉस वोटिंग की आशंका गहराई। पार्टी ने करीब 38 विधायकों को परिवार समेत बेंगलुरु शिफ्ट करने का फैसला लिया। स्पेशल चार्टर्ड प्लेन तैयार था। विधायक भोपाल एयरपोर्ट पहुंच चुके थे।
नामांकन रद्द होने की खबर मिलते ही प्लेन टेक-ऑफ के बाद वापस लैंड कराया गया। यह दृश्य कांग्रेस की असहजता और घबराहट को साफ दिखाता है। विधायक घंटों एयरपोर्ट पर फंसे रहे। पार्टी की यह पुरानी रणनीति (विधायकों को दूसरे राज्य शिफ्ट करना) इस बार भी काम नहीं आई और छवि को नुकसान पहुंचाया।
BJP का मास्टरस्ट्रोक: कैसे खेला गया पूरा खेल?
भाजपा ने इस पूरे खेल को बेहद चतुराई से खेला। पहले दो उम्मीदवार (तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल) घोषित किए। नामांकन के आखिरी दिन तीसरी सीट पर महेश केवट (मछुआ कल्याण बोर्ड अध्यक्ष) का पर्चा दाखिल कर दिया। यह कदम कांग्रेस पर दोहरा दबाव बनाने वाला था।
भाजपा नेताओं कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, वीडी शर्मा समेत कई मंत्रियों और वकीलों ने पूरे दिन रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय में डटे रहे। आपत्ति का लेटर सटीक समय पर दिया गया और कानूनी पहलुओं को मजबूती से रखा। रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले के बाद भाजपा शिविर में जश्न का माहौल है।
भाजपा के पास 163 विधायक हैं, जो तीनों सीटें आराम से जीतने के लिए पर्याप्त हैं। अगर आयोग या कोर्ट से कोई रोक नहीं लगी तो 18 जून को मतदान में भाजपा का क्लीन स्वीप तय है।
पेंच कहा फंसा?
कांग्रेस की इस पूरे प्रकरण में कई कमियां सामने आईं।
पहला – टिकट वितरण : मीनाक्षी नटराजन (पूर्व सांसद, मंदसौर) को टिकट दिए जाने पर स्थानीय नेताओं में काफी असंतोष था। कई दावेदार थे, लेकिन हाईकमान ने राहुल गांधी की करीबी को तरजीह दी। इससे आंतरिक कलह बढ़ी और क्रॉस वोटिंग की आशंका प्रबल हुई।
दूसरा – हलफनामे की लापरवाही: इतने महत्वपूर्ण मामले की जानकारी छिपाना या अनदेखी करना रणनीतिक चूक थी। भले ही कानूनी बहस हो कि सिर्फ नोटिस पर नामांकन रद्द होना उचित है या नहीं, लेकिन नियमों की अनदेखी ने पार्टी को भारी पड़ गया।
तीसरा – क्रॉस वोटिंग रणनीति: विधायकों को कर्नाटक भेजने का फैसला घबराहट भरा लगा। इससे भाजपा को और हमला करने का मौका मिला। कांग्रेस अब बचाव की मुद्रा में है और आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
BJP की चतुराई vs कांग्रेस की कमजोरियां
यह घटना भाजपा की रणनीतिक श्रेष्ठता को रेखांकित करती है। पार्टी ने न सिर्फ कानूनी हथियार इस्तेमाल किया, बल्कि समय का सही फायदा उठाया। तीसरा उम्मीदवार उतारकर उसने कांग्रेस को संख्या बल और मनोबल दोनों से कमजोर किया। मध्य प्रदेश में भाजपा की मजबूत पकड़ (163 विधायक) ने उसे यह दांव खेलने का आत्मविश्वास दिया।
दूसरी ओर, कांग्रेस की स्थिति चिंताजनक है। पार्टी पहले से ही संगठनात्मक कमजोरियों से जूझ रही है। स्थानीय vs हाईकमान की टकराहट, टिकट वितरण में असंतोष और रणनीतिक तैयारियों की कमी ने उसे यह झटका दिया।
सस्पेंस बरकरार
कांग्रेस कानूनी और राजनीतिक लड़ाई दोनों लड़ रही है। अगर नामांकन बहाल नहीं हुआ (जिसकी संभावना कम है क्योंकि नामांकन वापसी की तारीख निकल चुकी) तो वह बिना उम्मीदवार के रह जाएगी। 18 जून को मतदान है।
यह पूरा मामला भारतीय राजनीति की कड़वी सच्चाई दिखाता है जहां हलफनामे की एक छोटी सी चूक, आंतरिक कलह और विरोधी की सतर्कता पूरे समीकरण बदल सकती है। भाजपा उत्साहित है, कांग्रेस सदमे में। सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या कांग्रेस इस झटके से उबर पाएगी या भाजपा का यह दांव आने वाले चुनावों में भी असर दिखाएगा।
