रायपुर में साइंस कॉलेज चौपाटी हटाने पर सियासत गर्म: कृषि मंत्री बोले- “5 साल के लिए डफली-नगाड़ा मिला है, वे बजाते रहें”

रायपुर। साइंस कॉलेज मैदान से NIT चौपाटी को शिफ्ट करने की कार्रवाई के बाद कांग्रेस का लगातार विरोध जारी है। भाजपा ने अब इस पर तीखा हमला बोला है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कांग्रेस के प्रदर्शनों को ‘राजनीतिक जलन’ करार देते हुए कहा कि सरकार अच्छा काम कर रही है, तो कांग्रेस को बुरा लगता है। उन्होंने तंज कसते हुए बोला, “कांग्रेस को 5 साल के लिए डफली-नगाड़ा मिला है, वे बजाते रहें। हमारी नियत और नीति साफ है, अच्छे काम से रुकेंगे नहीं।”

 

इसी मुद्दे पर रायपुर महापौर मीनल चौबे ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “कांग्रेसी इस पर इतनी राजनीति क्यों कर रहे हैं? जब चौपाटी का ठेका सिंगला एजेंसी, एक रसूखदार ठेकेदार को दिया गया, तब गरीब दुकानदारों की चिंता क्यों नहीं हुई? यह अवैध चौपाटी हमेशा से भाजपा के विरोध में बनी थी।”

 

अवैध चौपाटी या गरीबों का पुनर्वास?

साइंस कॉलेज मैदान के पास बनी NIT चौपाटी को हाल ही में नगर निगम ने अमानाका रेलवे ओवरब्रिज के नीचे शिफ्ट कर दिया। यह कार्रवाई 22 नवंबर को हुई, जब JCB से 60-70 दुकानें तोड़ी गईं, जिनकी अनुमानित लागत 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है। चौपाटी का निर्माण पूर्व कांग्रेस सरकार में स्मार्ट सिटी योजना के तहत किया गया था, लेकिन भाजपा ने शुरू से ही इसका विरोध किया था। रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत ने 11 दिनों तक धरना दिया था, दावा करते हुए कि यह खेल विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण है।

 

हटाने के दौरान पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, आकाश तिवारी समेत कई कांग्रेस नेता धरने पर बैठे। विरोध इतना तीव्र था कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और कई कार्यकर्ताओं को घसीटते हुए हिरासत में लिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि बिना उचित पुनर्वास के 60 परिवारों की आजीविका छीन ली गई। विकास उपाध्याय ने कहा, “यह भाजपा की जिद है। डिग्री गर्ल्स कॉलेज के पास भी चौपाटी बनी है, वहां विरोध क्यों नहीं?”

 

यूथ हब बनेगा, भ्रष्टाचार की जांच होगी

भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि चौपाटी स्मार्ट सिटी के ‘यूथ हब’ प्रोजेक्ट के नाम पर बनी थी, जहां स्टेशनरी, कंप्यूटर दुकानें और लाइब्रेरी खुलनी थीं, न कि फूड स्टॉल। मूणत ने कहा, “कांग्रेस सरकार में हमने इसका विरोध किया था। अब नालंदा परिसर बनेगा, जो युवाओं के लिए फायदेमंद होगा।” महापौर चौबे ने 7 करोड़ के कथित भ्रष्टाचार पर जांच का भरोसा दिलाया, लेकिन कांग्रेस ने पलटवार किया कि “भाजपा सत्ता में आते ही पुरानी बातें भूल गई।”

 

दुकानदारों ने भी विरोध किया, कहते हुए कि “हम राजनीति के चक्कर में कुचले जा रहे हैं। बिना विकल्प के हटाना अन्याय है।” निगम ने दावा किया कि नए स्थान पर व्यवस्था की गई है, लेकिन व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने की शिकायतें आ रही हैं।

 

यह विवाद रायपुर की सियासत को और गर्म कर रहा है। कांग्रेस ने आंदोलन की चेतावनी दी है, जबकि भाजपा विकास के नाम पर कार्रवाई को सही ठहरा रही है। देखना होगा कि यह टकराव कब तक चलता है।

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