पहली बारिश में खुली 26 करोड़ के रेलवे ओवरब्रिज की पोल, 100 मीटर तक आई दरारें
राजनांदगांव। ग्रामीण इलाकों में रेल फाटक पर लगने वाले जाम से राहत देने के उद्देश्य से बनाए गए बरगा और आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज पहली ही बारिश के बाद विवादों में आ गए हैं। शनिवार रात हुई तेज बारिश के बाद दोनों पुलों पर सड़क धंसने, डामर उखड़ने और दरारें आने की तस्वीरें सामने आईं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इन परियोजनाओं की हालत देखकर स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है।
बरगा ओवरब्रिज में 100 मीटर तक दरारें, कई जगह सड़क धंसी
ग्रामीणों के अनुसार करीब दो महीने पहले शुरू किए गए बरगा रेलवे ओवरब्रिज की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। पुल के लगभग 100 मीटर हिस्से में लंबी दरारें दिखाई दे रही हैं। कई स्थानों पर सड़क धंस गई है, जबकि कई हिस्सों में डामर उखड़ने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में गंभीर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
आलीवारा ओवरब्रिज पर भी पहली बारिश का असर
करीब एक माह पहले शुरू हुए आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज पर भी पहली बारिश के बाद सड़क में दरारें और धंसाव की शिकायतें सामने आई हैं। एप्रोच रोड के कई हिस्सों में नुकसान होने के बाद रेलवे ने मरम्मत का काम शुरू कराया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि नए पुल पर पैबंद लगाने के बजाय निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराकर आवश्यकता पड़ने पर दोबारा निर्माण कराया जाना चाहिए।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
यह पहली बार नहीं है जब रेलवे ओवरब्रिज की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। इससे पहले मनगटा-मुढ़ीपार रेलवे ओवरब्रिज में भी निर्माण के कुछ समय बाद दरारें सामने आई थीं। उस मामले में भी मरम्मत कराई गई थी और मुद्दा विधानसभा तक पहुंचा था। अब बरगा और आलीवारा में सामने आई खामियों के बाद एक बार फिर निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
read more : स्थानीय लोगों को रोजगार देने पर मिलेगा सरकारी अनुदान, सरकार ने लागू किए नए नियम
ग्रामीणों ने की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
बरगा और आलीवारा के ग्रामीणों ने प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से मांग की है कि मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि केवल मरम्मत कर समस्या को छिपाने का प्रयास नहीं होना चाहिए। यदि निर्माण में लापरवाही हुई है तो संबंधित एजेंसी, गुणवत्ता परीक्षण करने वाले अधिकारियों और निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
रेलवे ने जांच और स्थायी समाधान का दिया भरोसा
दरारों और सड़क धंसने की सूचना मिलने के बाद रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे। सीनियर सेक्शन इंजीनियर एके मौर्य ने बताया कि क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि तकनीकी विशेषज्ञों की टीम पूरे मामले का परीक्षण करेगी और जहां जरूरत होगी वहां स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि केवल अस्थायी मरम्मत पर्याप्त नहीं है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए पूरी संरचना की व्यापक जांच आवश्यक है।
