कई पार्टियों को जीत दिलाने वाले मास्टर स्ट्रैटजिस्ट PK, अपनी ही पार्टी की ‘सबसे बड़ी हार’ से कैसे लड़ेंगे आगे की लड़ाई?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आते ही तस्वीर साफ हो चुकी है—एनडीए भारी बहुमत से सत्ता में लौट रहा है, वहीं लंबे समय तक कई राजनीतिक दलों को जीत का रास्ता दिखाने वाले प्रशांत किशोर (PK) अपनी ही राजनीतिक जमीन बचाने में नाकाम रहे हैं।
उनकी जन सुराज पार्टी, जिसने 243 में से हर सीट पर उतरने का दावा किया था, एक भी सीट नहीं जीत पाई। कई सीटों पर तो उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। यही नहीं, PK की जेडीयू को लेकर की गई भविष्यवाणी भी गलत साबित हुई है, क्योंकि जेडीयू इस चुनाव में 80 से अधिक सीटें जीतने की ओर बढ़ रही है।
PK की दोनों भविष्यवाणियां उलटी साबित हुईं
चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने दो बड़े दावे किए थे— अपनी जन सुराज पार्टी पर— “अर्श पर या फर्श पर” जेडीयू पर— “25 से ज्यादा सीटें नहीं आएंगी” लेकिन नतीजे ठीक उलटे निकले जेडीयू 80+ सीटों के साथ शानदार प्रदर्शन करती दिख रही है। PK की पार्टी ‘फर्श’ पर ही रह गई। 2010 के बाद यह जेडीयू का सबसे दमदार प्रदर्शन माना जा रहा है।
जन सुराज पार्टी का खराब प्रदर्शन—जमानत तक नहीं बची
प्रशांत किशोर की पार्टी ने सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की कोशिश की थी, लेकिन कई सीटों पर उनके उम्मीदवारों की स्थिति बेहद कमजोर रही।
ज्यादातर उम्मीदवार जमानत नहीं बचा पाए। पार्टी एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। PK ने नामांकन में गड़बड़ी के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन चुनावी नतीजों ने उनकी रणनीति की पोल खोल दी।
उन्होंने पार्टी शुरू करने से पहले महीनों तक पदयात्रा की और उसके बाद जन सुराज का गठन किया, लेकिन इसका चुनावी फायदा नहीं मिला।
‘विपक्ष कमजोर नहीं, विपक्ष की पार्टियां कमजोर’—PK का चर्चित बयान
PK का वह बयान जिसने सबसे अधिक चर्चा बटोरी:
“कमजोर विपक्ष नहीं है, बल्कि विपक्ष में मौजूद पार्टियां कमजोर हैं।”
उनकी यह बात भारतीय राजनीति के विश्लेषण का अहम हिस्सा मानी गई, लेकिन उनकी अपनी पार्टी विपक्ष का मजबूत विकल्प नहीं बन सकी।
अब PK के पास आगे कौन से विकल्प?
रणनीतिकार के रूप में प्रशांत किशोर की साख मजबूत रही है।
उन्होंने आई-पैक (I-PAC) के जरिए इन नेताओं को बड़ा चुनावी फायदा दिलाया:
नरेंद्र मोदी
नीतीश कुमार
ममता बनर्जी
अरविंद केजरीवाल
जगन मोहन रेड्डी
उद्धव ठाकरे
एम.के. स्टालिन
हालांकि, हर अभियान सफल नहीं रहा, और आलोचक इस पर उन्हें घेरते रहे हैं। इसके बावजूद— उनकी रणनीतिक समझ, व्यापक नेटवर्क, और राजनीतिक अनुभव, उन्हें आने वाले दिनों में वापसी का मौका दे सकते हैं।
बिहार में INDIA गठबंधन की बड़ी हार के बाद PK के पास अब राजनीतिक तौर पर कई नए रास्ते बन सकते हैं, जिन्हें वह अपनी जन सुराज पार्टी के जरिए तलाश सकते हैं।
