खाड़ी संकट के बीच भारत के लिए गेमचेंजर बना यह पोर्ट: होर्मुज के तनाव से बेअसर रहेगी सप्लाई चेन, चार गुना बढ़ी जहाजों की आवाजाही

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार गहराते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं का बड़ा समाधान सामने आया है। ऐसे नाजुक दौर में ओमान का रणनीतिक सोहर बंदरगाह भारत के लिए सबसे सुरक्षित और व्यवहार्य वैकल्पिक मार्ग के रूप में उभरा है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित भी रहती है, तब भी सोहर पोर्ट के जरिए भारत अपनी खाड़ी देशों के साथ होने वाली सप्लाई चेन को बिना किसी रुकावट के जारी रख सकेगा।

होर्मुज की संकरी पट्टी से बाहर होना सबसे बड़ी ताकत

सोहर पोर्ट ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित है। इसकी सबसे प्रमुख भौगोलिक विशेषता यह है कि यह होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे संकरे और संवेदनशील समुद्री क्षेत्र से पूरी तरह बाहर है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां पहुंचने वाले माल को समुद्री मार्ग के अतिरिक्त आधुनिक सड़क नेटवर्क के माध्यम से भी आगे भेजा जा सकता है। इसके अलावा ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तेजी से आकार ले रहा अत्याधुनिक रेल नेटवर्क भी आने वाले समय में सोहर पोर्ट को खाड़ी के अन्य प्रमुख बाजारों से सीधे जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत और सोहर के बीच फीडर सेवाओं में रिकॉर्ड चार गुना उछाल

मध्य पूर्व में संकट गहराने के बाद से भारत और सोहर बंदरगाह के बीच चलने वाली फीडर वेसल सेवाओं में लगभग चार गुना का जोरदार इजाफा देखा गया है। इससे पहले भारतीय मालवाहक जहाजों के जरिए सामान सीधे गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के अन्य देशों के आंतरिक बंदरगाहों तक पहुंचता था। मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए अब माल का एक बड़ा हिस्सा पहले सुरक्षित रूप से ओमान के सोहर पोर्ट पर उतारा जा रहा है और वहां से जमीनी रास्तों के जरिए गंतव्य तक पहुंचाया जा रहा है।

30 अरब डॉलर का मजबूत ढांचा और सऊदी अरब का भी बढ़ता भरोसा

सोहर पोर्ट और इसके विशेष आर्थिक क्षेत्र में अब तक 30 अरब डॉलर से अधिक का भारी निवेश किया जा चुका है। इस आधुनिक बंदरगाह की सालाना कार्गो संभालने की क्षमता 7.2 करोड़ टन से भी ज्यादा है। चालू वर्ष की पहली छमाही में ही यहां कंटेनर की आवाजाही में 40 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़कर 5.45 लाख टीईयू तक पहुंच गई है।

यह बंदरगाह न केवल भारतीय व्यापार के लिए बल्कि सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए भी एक अहम केंद्र बन रहा है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों के चलते सऊदी की प्रमुख ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का संचालन प्रभावित हुआ है, जो उसके पूर्वी तेल क्षेत्रों को यानबू बंदरगाह से जोड़ती है। इसके विकल्प के रूप में सऊदी अरब अब सोहर के तटवर्ती समुद्री क्षेत्र में शिप-टू-शिप ट्रांसफर के जरिए कच्चे तेल का सुरक्षित निर्यात कर रहा है। इसके तहत केवल सितंबर और अक्टूबर के दौरान ही लगभग 6 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी वैकल्पिक मार्ग से भेजने की योजना बनाई गई है।

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