दहकेगी दुनिया, टूटेगा 75 साल का रिकॉर्ड! NOAA की सुपर अल नीनो पर खतरनाक चेतावनी; जानिए भारत पर क्या पड़ेगा असर!
नई दिल्ली। अमेरिकी मौसम एजेंसी (NOAA) ने पूरी दुनिया के लिए एक बेहद खतरनाक और गंभीर मौसम अलर्ट जारी किया है। प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच चुका है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह साल 1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली सुपर अल नीनो बनने जा रहा है। इसके पिछले 75 सालों के सभी रिकॉर्ड तोड़ने की 69% संभावना है, जिससे पूरी दुनिया में भीषण गर्मी, सूखा और खाद्यान्न संकट का महा-खतरा मंडरा रहा है।
भारत के लिए राहत की बात: टल गया मानसून पर बड़ा खतरा
जहां एक तरफ पूरी दुनिया इस चेतावनी से कांप रही है, वहीं भारत के लिए फिलहाल एक राहत भरी खबर सामने आई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रशांत महासागर में उठने वाली तापीय तरंगों को भारत तक पहुंचने में 40 से 45 दिन का समय लगता है। जब तक इसका असर भारत पहुंचेगा, तब तक मानसून की आधिकारिक विदाई हो चुकी होगी।
हिंद महासागर में पॉजिटिव IOD (Indian Ocean Dipole) के सक्रिय रहने से भी भारत को मानसून के दौरान अल नीनो के सीधे और बड़े नुकसान से सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
सर्दियों की बारिश पर मंडराया संकट
1 जून से 13 अगस्त के बीच देश में सामान्य से 12 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जून में 35.4% की भारी गिरावट के बाद जुलाई में स्थिति थोड़ी सुधरी थी।
भले ही मानसून का मुख्य खतरा टल गया हो लेकिन अगस्त-सितंबर में सामान्य से कम बारिश की संभावना है। इसके अलावा अल नीनो के असर से भारत में रबी सीजन और सर्दियों में होने वाली बारिश में भारी कमी आ सकती है।
दुनिया भर में ‘महा-संकट’: पाम ऑयल, चावल और अनाज होंगे महंगे
अंतर्राष्ट्रीय जलवायु और कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह ‘सुपर अल नीनो’ वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख देगा।
महंगाई का झटका: दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में चावल और पाम ऑयल के उत्पादन में भारी गिरावट आएगी, जिससे दुनिया भर में खाने-पीने के सामान और खाद्य तेल रिकॉर्ड स्तर पर महंगे हो जाएंगे।
ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में भयंकर सूखा: इंडोनेशिया, मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया में मूसलाधार बारिश का दौर थम जाएगा, जिससे वहां भीषण सूखा पड़ेगा और जंगलों में भीषण आग (Forest Fires) का तांडव देखने को मिलेगा।
टूटेंगे गर्मी के सारे रिकॉर्ड: प्रशांत महासागर से निकलने वाली इस भारी-भरकम ऊर्जा के कारण 2026-27 का साल मानव इतिहास का सबसे गर्म साल साबित हो सकता है।
