पत्नी करे ‘बेवफाई’ तो क्या पति देगा भरण-पोषण? जानिए HC में पति ने ऐसा क्या किया कि जज ने पलट दिया फैसला!
जबलपुर। वैवाहिक विवाद और भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बेहद अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर पत्नी ने बेवफाई की है और पति के पास उसके अवैध संबंधों के पर्याप्त और पुख्ता सबूत मौजूद हैं तो अदालत उन सबूतों को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की बेंच ने इसी टिप्पणी के साथ छतरपुर फैमिली कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें पति को हर महीने 6000 रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया था। हाई कोर्ट ने निचली अदालत को इस मामले में दोबारा मुकदमा चलाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
दिल्ली का पति, छतरपुर की पत्नी
याचिकाकर्ता पति मूल रूप से दिल्ली का रहने वाला है, जिसकी शादी मध्य प्रदेश के छतरपुर निवासी एक महिला से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया और मामला छतरपुर फैमिली कोर्ट में पहुंच गया। सुनवाई के बाद साल 2018 में छतरपुर फैमिली कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पति को निर्देश दिया था कि वह अपनी पत्नी को भरण-पोषण के रूप में हर महीने 6000 रुपये अदा करे।
पति ने हाई कोर्ट में खोली पोल, पेश की ‘CD’
छतरपुर फैमिली कोर्ट के इस एकतरफा फैसले के खिलाफ पति ने जबलपुर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता ने बताया कि उसकी पत्नी के कई अन्य लोगों के साथ अवैध संबंध हैं, जिसके चलते वह भरण-पोषण पाने की हकदार नहीं है।
अपनी बात साबित करने के लिए पति ने हाई कोर्ट में पत्नी की कॉल रिकॉर्डिंग की सीडी (CD), ट्रांसक्रिप्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूत पेश किए। पति का सीधा आरोप था कि छतरपुर फैमिली कोर्ट ने इन सभी अहम सबूतों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और बिना जांचे गुजारा भत्ता देने का आदेश सुना दिया।
सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते: हाई कोर्ट
मामले की सुनवाई और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को देखने के बाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि फैसला सुनाने से पहले अदालत के लिए सबूतों की गहनता से जांच और अध्ययन करना बेहद जरूरी है। यदि पति के पास पत्नी के खिलाफ अवैध संबंधों के पर्याप्त सबूत हैं, तो फैमिली कोर्ट उन्हें सिरे से नजरअंदाज नहीं कर सकता।
हाई कोर्ट ने छतरपुर फैमिली कोर्ट के साल 2018 के आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इसके साथ ही मामले को वापस निचली अदालत भेजते हुए निर्देश दिया है कि पति द्वारा पेश किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की गहनता से जांच की जाए और मामले का दोबारा से ट्रायल किया जाए।
