Gwalior Accident News: 15 मौतों के बाद ग्वालियर में आक्रोश, पुलिस-प्रशासन पर परिजनों ने लगाए आरोप
Gwalior Accident: 15 मौतों के बाद अस्पताल में हंगामा
Gwalior Accident: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण हादसे के बाद मृतकों के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। रविवार, 18 अक्टूबर की सुबह अस्पताल में पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बड़ी संख्या में परिजन जमा हो गए और जिला प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। परिजनों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद उन्हें अपनों की स्थिति के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई और इलाज में भी देरी हुई।
जानकारी के मुताबिक, देर रात पहाड़ी पर एक ट्रक अनियंत्रित हो गया, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ। घटना में कम से कम 15 लोगों की मौत और 25 से अधिक लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। हादसे के बाद अस्पताल पहुंचे परिवारों का आरोप है कि उन्हें काफी देर तक यही बताया जाता रहा कि उनके बच्चे का इलाज चल रहा है, जबकि बाद में उन्हें उसकी मौत की जानकारी मिली।
‘हादसा 2 बजे हुआ तो अस्पताल 4 बजे क्यों लाया गया?’
Gwalior Accident में अपनों को खोने वाले परिजनों ने सवाल उठाया कि यदि दुर्घटना रात करीब 2 बजे हुई थी, तो घायलों को अस्पताल पहुंचाने में देरी क्यों हुई। एक परिजन ने आरोप लगाया कि उनके बच्चे को समय पर अस्पताल लाया जाता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
परिजनों का कहना है कि वे रातभर अस्पताल में इस उम्मीद में बैठे रहे कि उनके बच्चे का इलाज चल रहा है। सुबह तक उन्हें मौत की जानकारी नहीं मिली। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें पुलिस की ओर से भी सही सूचना नहीं दी गई और बाद में दोस्तों के जरिए अपने बच्चे की मौत का पता चला।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे कागजात पर हस्ताक्षर करने को कहा जा रहा था, जबकि वे अभी तक अपने बच्चों की स्थिति और घटना से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं समझ पाए थे।
मां का आरोप, ‘मेरा बेटा जिंदा था, फिर पोस्टमार्टम हाउस क्यों भेजा?’
Gwalior Accident में जान गंवाने वाले गौरव की मां किरण ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उनके बेटे के जिंदा होने के बावजूद पुलिसकर्मी उसे पोस्टमार्टम हाउस भेज रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की लापरवाही के कारण उनके बेटे की जान चली गई।
एक अन्य महिला ने भी अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि जब वह अस्पताल पहुंचीं, तो उन्हें अपने बच्चे से मिलने तक नहीं दिया गया। उन्हें बताया गया कि बच्चा ठीक है और उसका इलाज चल रहा है। महिला के मुताबिक, उन्हें इंतजार करने को कहा गया और बाद में घर छोड़ दिया गया। इसके बाद फोन पर उन्हें बच्चे की मौत की सूचना मिली।
महिला ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने बच्चे का चेहरा तक नहीं दिखाया गया। उन्होंने बताया कि उनका बेटा करीब 17 से 18 साल का था। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। महिला ने पुलिस प्रशासन पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
दिव्यांश की मां ने पूछा- ‘मेरी बेटी को उन्हें ढूंढने क्यों नहीं दिया?’
इस Gwalior Accident में अपने बेटे दिव्यांश को खोने वाली मां भी फूट-फूटकर रो पड़ीं। उन्होंने बताया कि परिवार में उनकी बहू और बड़े-छोटे बेटे भी मौजूद थे। उन्हें हादसे की जानकारी सुबह करीब 6 बजे मिली।
दिव्यांश की मां का आरोप है कि उनकी बेटी परिवार के सदस्यों को खोजने के लिए गई थी, लेकिन पुलिस ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब परिवार के लोग लापता थे, तो पुलिस ने उनकी बेटी को उन्हें तलाशने क्यों नहीं दिया।
उन्होंने भावुक होकर कहा कि यदि किसी का अपना बच्चा लापता हो जाए, तो उसे ढूंढने में मदद करना पुलिस की जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि पुलिस ने न तो परिवार के सदस्यों को खोजने में पर्याप्त मदद की और न ही उनकी बेटी को तलाश करने दिया।
Gwalior Accident के बाद पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
Gwalior Accident के बाद पीड़ित परिवारों ने इलाज में देरी, मौत की सूचना समय पर नहीं मिलने और परिजनों को तलाशने में मदद न किए जाने जैसे आरोप लगाए हैं। अस्पताल के बाहर हुए हंगामे के दौरान परिवारों ने प्रशासन से जवाब मांगा।
फिलहाल, परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है। हादसे में घायलों को समय पर उपचार मिला या नहीं, परिजनों को सूचना देने में कोई चूक हुई या नहीं और पुलिस की भूमिका क्या रही, इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
