MP में अब नहीं चलेगी अफसरों की मनमानी! उद्योग की फाइल लटकाई तो सीधा लगेगा जुर्माना
भोपाल। मध्य प्रदेश में नए उद्योग स्थापित करने वाले कारोबारियों और निवेशकों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने और लालफीताशाही को खत्म करने के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम 2026’ (Ease of Doing Business Act 2026) लागू कर दिया गया है। सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इस नए कानून के लागू होने से न सिर्फ सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी खत्म होगी, बल्कि काम में जानबूझकर देरी करने वाले अधिकारियों पर सीधा एक्शन लिया जाएगा।
सिंगल विंडो सिस्टम से मिलेंगी 76 तरह की मंजूरियां
पहले नया उद्योग लगाने के लिए निवेशकों को बिजली, श्रम, पर्यावरण और अन्य विभागों की एनओसी (NOC) लेने के लिए अलग-अलग दफ्तरों के धक्के खाने पड़ते थे। नए नियम के तहत, अब 76 तरह की विभिन्न मंजूरियों के लिए अलग-अलग दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी। यह सभी काम अब एक ही ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ के जरिए आसानी से ऑनलाइन हो जाएंगे।
अफसरों की मनमानी पर लगेगी लगाम, लगेगा जुर्माना
इस अधिनियम का सबसे कड़ा प्रावधान अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है। अब कोई भी अफसर फाइल को अपनी टेबल पर दबाकर नहीं रख सकेगा।
तय समय में काम जरूरी: अगर किसी अधिकारी ने निर्धारित समय सीमा के अंदर उद्योग से जुड़ी फाइल को पास नहीं किया या उसे अटका कर रखा, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
ऑटो-ट्रांसफर होगी फाइल: समय सीमा खत्म होते ही अधिकारी का दखल खत्म हो जाएगा और सिस्टम के जरिए फाइल अपने आप अगली अधिकृत अथॉरिटी के पास ट्रांसफर हो जाएगी।
MPIDC को मिली पूरी जिम्मेदारी
इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य सरकार ने MPIDC को नोडल एजेंसी बनाया है। MPIDC ही इस सिंगल विंडो सिस्टम की मॉनिटरिंग करेगा और निवेशकों को हर संभव मदद मुहैया कराएगा।
