Chhattisgarh Naxal Surrender: बस्तर में आज फिर बड़ा सरेंडर, 50 से ज्यादा हार्डकोर नक्सली हथियार डालेंगे; 40 लाख का इनामी रामधेर भी हो सकता है शामिल

Chhattisgarh Naxal Surrender

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बस्तर। Chhattisgarh Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के आत्मसमर्पण का सिलसिला लगातार जारी है। अब एक बार फिर पुलिस और प्रशासन को बड़ी कामयाबी मिलने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, उत्तर बस्तर से 50 से अधिक हार्डकोर नक्सली आज आत्मसमर्पण करने जा रहे हैं, जिनमें 40 लाख रुपए का इनामी माओवादी रामधेर भी शामिल हो सकता है। बताया जा रहा है कि यह सरेंडर महला कैंप में होने की संभावना है, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

हाल ही में हुआ था देश का सबसे बड़ा नक्सली आत्मसमर्पण

कुछ दिनों पहले ही बस्तर में नक्सल इतिहास का सबसे बड़ा सरेंडर देखने को मिला था। इस दौरान 208 नक्सलियों ने अपने हथियार पुलिस को सौंप दिए थे, जिनका नेतृत्व माओवादी नेता रूपेश कर रहा था। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, दोनों उपमुख्यमंत्री, डीजीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को संविधान की प्रति और गुलाब का फूल देकर समाज में वापस स्वागत किया गया था।

इस सरेंडर से ठीक पहले माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य भूपति उर्फ सोनू दादा समेत करीब 60 माओवादियों ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने आत्मसमर्पण किया था।

भूपेश बघेल ने सरकार के दावे पर उठाए सवाल

सरकार का दावा है कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सलमुक्त किया जाएगा, लेकिन विपक्ष इस दावे पर सवाल उठा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि “नक्सलवाद के खात्मे की कोई डेडलाइन तय नहीं की जा सकती।” उनके अनुसार, “नक्सली रणनीति के तहत कुछ समय शांत रहते हैं और फिर किसी बड़े हमले की तैयारी करते हैं।”

भूपेश बघेल ने कहा कि यह सरेंडर नक्सलियों की योजनाबद्ध चाल भी हो सकती है। वहीं, सत्तापक्ष की ओर से उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने जवाब देते हुए कहा कि, “बस्तर जल्द ही नक्सलमुक्त होगा, बस थोड़ा इंतजार कीजिए।”

सरकार का दावा है कि हाल के महीनों में हुए आत्मसमर्पण यह संकेत हैं कि नक्सल संगठन टूटने की कगार पर हैं। वहीं विपक्ष का कहना है कि नक्सलवाद का सफाया केवल आत्मसमर्पण से नहीं, बल्कि विकास और विश्वास से संभव है।

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