मानपुर नक्सली हमले की 17वीं बरसी: जहां कभी गोलियां गूंजती थीं, आज वहां विकास का नया अध्याय

Manpur naxal attack anniversary 2026

12 जुलाई 2009 को एसपी वीके चौबे समेत 29 जवानों ने दी थी शहादत, 17 साल बाद क्षेत्र पूरी तरह नक्सलमुक्त और विकास की राह पर

 

 

 

मोहला-मानपुर। आज से ठीक 17 साल पहले, 12 जुलाई 2009 को छत्तीसगढ़ के मानपुर क्षेत्र में नक्सलियों ने एक ऐसा खूनी हमला किया था, जिसने पूरे प्रदेश और देश को झकझोर दिया। इस हमले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार (वी.के.) चौबे समेत 29 पुलिस जवान शहीद हो गए। आज उस नक्सली हमले की 17वीं बरसी है।

 

12 जुलाई 2009: वह काला दिन

12 जुलाई 2009 को नक्सलियों ने सबसे पहले मदनवाड़ा पुलिस कैंप के पास तैनात दो जवानों की हत्या कर दी। उनका उद्देश्य पुलिस को घटनास्थल तक बुलाना था। जैसे ही घटना की सूचना मिली, तत्कालीन एसपी वी.के. चौबे स्वयं पुलिस बल के साथ राजनांदगांव से मदनवाड़ा के लिए रवाना हुए।

 

नक्सलियों ने पहले से ही कई स्थानों पर घात लगाया हुआ था। मदनवाड़ा, कारेकट्टा और कोरकोट्टी के बीच अलग-अलग जगहों पर बारूदी सुरंग विस्फोट और अंधाधुंध फायरिंग कर पुलिस दल को निशाना बनाया गया। इस सुनियोजित हमले में एसपी वी.के. चौबे समेत 29 जवान शहीद हो गए।

 

शहीदों की सूची

इस हमले में शहीद होने वालों में एसपी विनोद कुमार चौबे के अलावा, उप निरीक्षक रामनिवास मंडल, पवन कुमार साहू, सतीश कुमार राय, मनोज कुमार कोसरिया, अशोक कुमार, अशोक कुमार जुर्री, मुकेश कुमार पटेल, हेमराज सिन्हा, विकास कुमार, महेंद्र कुमार, रामसिंह, चंद्रशेखर, परमानंद, संजय, सुरेंद्र, नंदकुमार, कुंवर सिंह, चैतन्य, रामराज, चंद्रकांत, रूपसिंह, राजेंद्र, दयाशंकर, कमलेश, भगवान सिंह, रामनिवास (दूसरे), पवन (दूसरे) और नागेश्वर साहू शामिल हैं।

 

17 साल बाद: विकास की नई तस्वीर

संयोग यह है कि उस समय भी रविवार था और आज भी रविवार है। लेकिन इन दोनों रविवारों में बड़ा अंतर है। 17 साल पहले जंगल गोलियों और धमाकों की आवाज से गूंज उठा था, जबकि आज वही इलाका शांति, विकास और नक्सलमुक्त वातावरण का प्रतीक बन चुका है।

 

उस समय यह क्षेत्र नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। लेकिन शहीद जवानों के बलिदान और सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की नींव रखी। जिन नक्सलियों ने उस समय सुरक्षा बलों पर हमला किया था, वे या तो मारे जा चुके हैं, गिरफ्तार हुए हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। आज इस क्षेत्र में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां अब विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है।

 

 

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