Mamata Banerjee प्रोटेस्ट: सड़क पर ममता, सत्ता में भाजपा… क्या बंगाल में फिर दोहराया जाएगा 2006 का इतिहास?
अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले और TMC नेताओं के खिलाफ कथित हिंसा के विरोध में Mamata Banerjee ने कोलकाता में धरना दिया। पुलिस की अनुमति न मिलने के बावजूद टीएमसी ने प्रदर्शन जारी रखा।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सियासी संघर्ष और तेज हो गया है। अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के विरोध में Mamata Banerjee खुद सड़क पर उतर आईं। पुलिस की अनुमति न मिलने के बावजूद धरना, संविधान की किताब के साथ प्रदर्शन और भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप… आखिर बंगाल में क्या फिर सिंगुर जैसा बड़ा आंदोलन आकार ले रहा है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
बंगाल में फिर सिंगुर जैसी आहट? इजाजत न मिलने पर भी धरने पर बैठीं Mamata Banerjee, शुभेंदु सरकार के खिलाफ टीएमसी का हल्लाबोल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उबाल देखने को मिल रहा है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच टीएमसी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के नेताओं पर हुए कथित हमलों के विरोध में कोलकाता में बड़ा प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं और भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव
हाल के दिनों में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हुए हमले ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार बनने के बाद उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया है।
ममता बनर्जी ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी पार्टी सड़क पर उतरने को मजबूर हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस की अनुमति नहीं, फिर भी धरना जारी
मंगलवार को Mamata Banerjee अपने आवास से निकलकर कोलकाता के रानी रासमणि एवेन्यू पहुंचीं। यहां उन्होंने सांसद कल्याण बनर्जी और अन्य नेताओं के साथ धरना शुरू किया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि भले ही पुलिस ने उन्हें अनुमति नहीं दी हो, लेकिन लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना उनका अधिकार है और वे इसे जारी रखेंगी।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
संविधान की किताब लेकर पहुंचीं Mamata Banerjee
धरना शुरू करने से पहले ममता बनर्जी ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके हाथ में संविधान की प्रति भी दिखाई दी। राजनीतिक जानकार इसे एक प्रतीकात्मक संदेश मान रहे हैं, जिसके जरिए ममता लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का मुद्दा उठाना चाहती हैं।

भाजपा का पलटवार
टीएमसी के प्रदर्शन पर भाजपा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस अपनी चुनावी हार को स्वीकार नहीं कर पा रही है और जनता का ध्यान भटकाने के लिए सड़क पर उतर रही है।
भाजपा नेता समिक भट्टाचार्य ने कहा कि टीएमसी के ऐसे राजनीतिक प्रदर्शन और आरोपों से भाजपा सरकार पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता ने बदलाव के लिए भाजपा को चुना है और सरकार विकास के एजेंडे पर काम कर रही है।
क्या फिर दोहराएगा सिंगुर आंदोलन जैसा इतिहास?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात करीब दो दशक पहले हुए सिंगुर आंदोलन की याद दिला रहे हैं। उस समय ममता बनर्जी ने सड़क से संघर्ष करते हुए राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव किया था। अब सत्ता से बाहर होने के बाद एक बार फिर वे जनआंदोलन की राह पर दिखाई दे रही हैं।
हालांकि परिस्थितियां पहले से अलग हैं और इस बार भाजपा सत्ता में है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह आंदोलन कितना व्यापक रूप लेता है और बंगाल की राजनीति को किस दिशा में लेकर जाता है।
आगे क्या?
फिलहाल राज्य में राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। टीएमसी नेताओं पर हमलों के आरोप, भाजपा के जवाबी हमले और लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों ने बंगाल की राजनीति को फिर से संघर्ष के दौर में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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