Khandwa Accident: खंडवा में दुर्गा विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा, ट्रैक्टर-ट्रॉली तालाब में गिरी, 11 की मौत

Khandwa Accident

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Khandwa Accident: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा हो गया। पंधाना के जामली गांव में गुरुवार शाम एक ट्रैक्टर-ट्रॉली तालाब में गिर गई। इस दर्दनाक घटना में 8 बच्चियों समेत 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 लोग गंभीर हालत में खंडवा जिला अस्पताल में भर्ती हैं। मृतकों की उम्र 7 से 25 साल के बीच बताई जा रही है। हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है।

हादसा कैसे हुआ

गुरुवार दोपहर करीब साढ़े 3 बजे पाडला फाटा फलिया से ग्रामीण दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए अर्दला तालाब पहुंचे थे। ट्रैक्टर जैसे ही तालाब किनारे पहुंचा, उसका संतुलन बिगड़ गया और पहले ट्रॉली पलटी, फिर ट्रैक्टर भी उसके ऊपर पलट गया। ट्रॉली में बैठे लोग पानी में दब गए। हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

युवकों ने बचाई जान

घटना के बाद वहां मौजूद कई युवकों ने बहादुरी दिखाते हुए तालाब में छलांग लगा दी और 9 लोगों को बाहर निकाला। इन्हें पंधाना अस्पताल ले जाया गया, जहां से 3 को गंभीर हालत में खंडवा रेफर कर दिया गया।

देर से पहुंची रेस्क्यू टीम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के करीब दो घंटे बाद शाम साढ़े 6 बजे रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। बड़ी क्रेन और जेसीबी की मदद से ट्रैक्टर-ट्रॉली को तालाब से बाहर निकाला गया। रात साढ़े 8 बजे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला और आखिरी शव 7 साल की बच्ची चंदा का निकाला गया।

विवादित बातें सामने आईं

ग्रामीणों ने बताया कि तालाब तक जाने वाली सड़क पर ड्यूटी पर मौजूद कोटवार ने ड्राइवर को तालाब के अंदर जाने से रोका था, लेकिन उसने नहीं माना। बताया जा रहा है कि ड्राइवर नशे में था। वहीं, कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ट्रॉली में बैठे युवाओं ने ड्राइवर पर पानी में गाड़ी आगे ले जाने का दबाव बनाया, जिससे ट्रैक्टर तालाब की गहराई में पलट गया।

प्रशासन और डॉक्टरों का बयान

खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि ड्राइवर को तालाब की गहराई का अंदाजा नहीं था। अति उत्साह में ट्रॉली समेत तालाब में उतरने के कारण यह बड़ा हादसा हुआ। वहीं, डॉक्टरों ने बताया कि तीन गंभीर घायलों के फेफड़ों में पानी भर गया है, जिन्हें आईसीयू में ऑब्जर्वेशन पर रखा गया है।

पूरे गांव में मातम

यह हादसा इतना भयावह था कि पाडला फाटा फलिया के करीब 40 आदिवासी परिवारों के घरों में मातम छा गया। सभी परिवार नवरात्रि के 9 दिन पर्व मनाकर दुर्गा विसर्जन के लिए निकले थे, लेकिन इस हादसे ने खुशी को मातम में बदल दिया। रात को किसी के घर चूल्हा तक नहीं जला।

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