जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस में जारी घमासान- कौन है असली ‘कांग्रेसिए’ और कौन स्लीपर सेल?
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद मचे घमासान का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सूची जारी होने के बाद नेताओं की नाराजगी, विरोध और इस्तीफों के बीच अब एक बड़ा आरोप सामने आया है। कांग्रेस के पूर्व शहर अध्यक्ष मोनू सक्सेना ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भोपाल जिला अध्यक्ष की कुर्सी बीजेपी से जुड़े व्यक्ति को दी गई है।
‘डिफेंडर गाड़ी गिफ्ट की गई, तब बना जिला अध्यक्ष’
मोनू सक्सेना ने दावा किया कि भोपाल के नए जिला अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना को पद पर बैठाने के पीछे सौदेबाजी हुई है। उनका कहना है कि एक डिफेंडर गाड़ी गिफ्ट करने के बाद उन्हें जिला अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जानकारी उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिली है। मोनू ने कहा कि आने वाले दो से तीन दिनों में वे सबूतों के साथ मीडिया के सामने पेश होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रवीण सक्सेना और संजीव सक्सेना वास्तव में बीजेपी से जुड़े हुए हैं और कांग्रेस में रहकर ‘स्लीपर सेल’ की तरह काम कर रहे हैं।
सुरेश पचौरी का नाम भी आया सामने
मोनू सक्सेना ने आरोपों में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी का नाम भी घसीटा। उन्होंने कहा कि सुरेश पचौरी भले ही बीजेपी में चले गए हों, लेकिन उनके समर्थक अब भी कांग्रेस में पद पा रहे हैं। इससे पार्टी की निष्ठा और संगठन की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गुना में भी असंतोष की गूंज
केवल भोपाल ही नहीं, गुना जिले में भी जिला अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चर्चा गर्म है। यहां विधायक जयवर्धन सिंह ने संगठन की रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि जो लोग विरोध कर रहे हैं, वे संगठन की सर्जन प्रक्रिया को समझ नहीं रहे। पार्टी ने कई जिलों में कद्दावर नेताओं को जिला अध्यक्ष बनाया है और यह राहुल गांधी की सोच का हिस्सा है। जयवर्धन सिंह ने कहा कि जिन लोगों को आपत्ति है, उन्हें अपनी बात पार्टी फोरम में रखनी चाहिए न कि सार्वजनिक मंचों पर।
कांग्रेस में अंदरूनी कलह गहराई
मध्यप्रदेश कांग्रेस में लगातार बढ़ते विवाद और आरोप-प्रत्यारोप ने यह साफ कर दिया है कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति संगठन के भीतर गुटबाजी को और हवा दे रही है। जहां एक ओर पार्टी नेतृत्व इन नियुक्तियों को संगठन मजबूत करने का कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर कई स्थानीय नेता इसे मनमानी और सौदेबाजी करार दे रहे हैं।
