बिजली उपभोक्ताओं को टैरिफ बढ़ोतरी का झटका तय, जून के बिल में एफपीपीएएस से मिली आंशिक राहत

रायपुर:  छत्तीसगढ़ के 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही नई बिजली दरों (टैरिफ) के रूप में झटका लगना तय है। हालांकि, नए टैरिफ पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है, लेकिन जून के बिजली बिल में उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत एफपीपीएएस शुल्क (फ्यूल पॉवर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज) के माइनस में होने से मिली है।

एफपीपीएएस में उतार-चढ़ाव से बिलों पर असर

अप्रैल 2024 में पहली बार एफपीपीएएस शुल्क माइनस में गया था, जिससे मई में आए बिल में उपभोक्ताओं को 12.61% शुल्क नहीं देना पड़ा। लेकिन फिर जून में मई का बिल 7.32% एफपीपीएएस शुल्क के साथ आया। अब जून का बिल जो जुलाई में आएगा, उसमें एफपीपीएएस फिर से माइनस हो गया है, जिससे थोड़ी राहत मिलेगी।

एफपीपीएएस शुल्क दरअसल वीसीए शुल्क की जगह शुरू की गई एक नई प्रणाली है, जिसके तहत बिजली की उत्पादन लागत में आए अंतर को उपभोक्ताओं से वसूला जाता है। यह फार्मूला अप्रैल 2023 से लागू है और तब से उपभोक्ताओं को हर महीने इसका बोझ उठाना पड़ा है। पहले यह शुल्क इसलिए अधिक था क्योंकि एनटीपीसी लारा परियोजना से खरीदी गई बिजली का करीब 1500 करोड़ का अंतर पिछले छह माह से वसूला जा रहा था। अब वह अंतर खत्म हो चुका है, इसलिए एफपीपीएएस माइनस में आया है।

टैरिफ बढ़ने के संकेत, 4560 करोड़ के अंतर की भरपाई जरूरी

छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी ने 2025-26 के लिए बिजली नियामक आयोग को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें बताया गया है कि कंपनी इस वित्तीय वर्ष में 24,652 करोड़ रुपये की बिजली बेचेगी, जबकि उसका अनुमानित खर्च 23,082 करोड़ रुपये रहेगा। यानी कंपनी को 1570 करोड़ रुपये का लाभ संभावित है।

हालांकि, 2023-24 में कंपनी को 6130 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। अगर 1570 करोड़ की लाभ राशि को इसमें समायोजित किया जाए, तो 4560 करोड़ रुपये का अंतर अब भी बना हुआ है। इसी अंतर की भरपाई के लिए कंपनी ने टैरिफ बढ़ाने की मांग की है। अब यह बिजली नियामक आयोग पर निर्भर करेगा कि वह कितना टैरिफ वृद्धि को स्वीकृति देता है।

Youthwings