DEd Applicants Protest: 206 दिनों से जारी है धरना, विधानसभा घेराव के लिए निकली रैली
न्यायालय के आदेशों के बावजूद 2,300 पदों पर नियुक्ति नहीं, अभ्यर्थियों ने उठाया सवाल- क्या प्रशासनिक तंत्र अदालत के आदेशों से ऊपर हो गया है?
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षक नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे डीएड अभ्यर्थियों का धरना गुरुवार को 206वें दिन भी जारी रहा। न्याय की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने नया रायपुर स्थित धरना स्थल से दण्डवत् प्रणाम रैली निकालते हुए विधानसभा घेराव के लिए कूच किया। हालांकि विधानसभा की ओर बढ़ रहे अभ्यर्थियों को पुलिस ने धरना स्थल के मुख्य गेट पर ही रोक दिया। यह प्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर बढ़ती नाराजगी को दर्शाता है।
आंदोलनकारी डीएड अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सरकार और प्रशासन 2,300 रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह केवल अभ्यर्थियों के अधिकारों का ही नहीं, बल्कि न्यायपालिका के आदेशों की भी अवहेलना है।
‘क्या प्रशासनिक तंत्र अदालत के आदेशों से ऊपर हो गया है?’
अभ्यर्थियों ने कहा कि भारत के संविधान में न्यायपालिका को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, लेकिन 206 दिनों से लगातार चल रहे उनके अनशन के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
संघर्षरत अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि यदि न्यायालय के आदेशों का भी पालन नहीं हो रहा है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, “क्या प्रशासनिक तंत्र अब संविधान और अदालत के आदेशों से भी ऊपर हो गया है?”
पुलिस ने मुख्य गेट पर ही रोका
अभ्यर्थियों ने दण्डवत् प्रणाम रैली निकालते हुए विधानसभा की ओर कूच किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें धरना स्थल के मुख्य गेट पर ही रोक दिया। इससे अभ्यर्थियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें आगे बढ़ने से रोक रहा है।
इसमें अभ्यर्थियों ने सरकार से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने और न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए 2,300 रिक्त पदों पर भर्ती करने की मांग दोहराई। साथ ही चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
डीएड अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी इस लड़ाई को अंत तक जारी रखेंगे और किसी भी कीमत पर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे। फिलहाल, सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई है और अभ्यर्थी धरना स्थल पर डटे हुए हैं।
